गढ़वा/वंशीधर नगर। प्रखंड अंतर्गत स्वास्थ्य केंद्र कोइंर्दी में सोमवार को अहले सुबह प्रसव के दौरान जच्चा और बच्चा की मौत हो गयी। इसके कारण सरकार द्वारा संस्थागत प्रसव को बढ़ावा दिये जाने को लेकर चलाये जा रहे अभियान पर प्रश्न चिह्न लग गया है। समाचार के अनुसार नगरउंटारी प्रखंड के भोजपुर गांव निवासी कृष्णा भुईयां की 20 वर्षीय पत्नी आरती देवी को सुबह में प्रसव पीड़ा होने पर परिजनों द्वारा उसे तत्काल स्वास्थ्य केंद्र कोइंर्दी में भर्ती कराया गया था। आरती देवी ने बच्चे को जन्म दिया था। जन्म के कुछ देर बाद ही बच्चे की मौत हो गयी। बच्चे की मौत के बाद आरती देवी की हालत गंभीर हो गयी। हालत गंभीर होता देख एएनएम ने उसे अनुमंडलीय अस्पताल वंशीधर नगर रेफर कर दिया।

परिजनों द्वारा उसे आनन-फानन में अनुमंडलीय अस्पताल लाया गया, जहां ड्यूटी में तैनात चिकित्सक डॉ रामानुज प्रसाद द्वारा महज पांच मिनट में ही उसे सदर अस्पताल गढ़वा रेफर कर दिया गया। गढ़वा ले जाने के क्रम में रास्ते में ही उसकी मौत हो गयी। जच्चा-बच्चा की मौत से संस्थागत प्रसव पर प्रश्न उठ रहे हैं। सरकार मातृ-शिशु मृत्यु दर को रोकने के लिए संस्थागत प्रसव को बढ़ावा दे रही है। इसके लिए प्रति वर्ष करोड़ों रुपये पानी की तरह बहा रही है, किंतु स्वास्थ्य विभाग में व्याप्त व्यवस्था और विभागीय लापरवाही के कारण मातृ-शिशु मृत्यु रुकने का नाम नहीं ले रहा है। वहीं गर्भवती महिलाओं को संस्थागत प्रसव का लाभ नहीं मिल पा रहा है।

इधर सरकार द्वारा मातृ-शिशु मृत्यु दर पर पूर्णतया रोक लगाने के लिए जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम चलाया जा रहा है। इसमें शत-प्रतिशत संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने के लिए गर्भवती महिलाओं को नि:शुल्क जांच, दवाएं एवं सर्जरी की सुविधा दी जाती है। साथ ही प्रसव पूर्व गर्भवती महिलाओं की चार बार स्वास्थ्य जांच की जाती है। वहीं स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा संस्थागत प्रसव के लिए महिलाओं को जागरूक भी किया जाता है, जिससे कि प्रसव में किसी प्रकार की परेशानी न हो। बावजूद इसके संस्थागत प्रसव में इस तरह से महिलाओं की मौत स्वास्थ्य सुविधाओं एवं चिकित्सीय संसाधनों की कमियों को उजागर करता है।

क्या कहती हैं डीएस
जच्चा-बच्चा की मौत होने के संबंध में पूछने पर अनुमंडलीय अस्पताल की डीएस डॉ सुचित्रा कुमारी भड़क गयीं और कहा कि अनुमंडलीय अस्पताल में उसकी मौत नहीं हुई है। वह इस मामले में कोई प्रतिक्रिया देने के लिए बाध्य नहीं हैं।

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