आजाद सिपाही संवाददाता
रांची। दो हजार में दम नहीं ,बीस हजार से कम नहीं, भीख नहीं आधिकार चाहिए जीने का आधिकार चाहिए, सभी सहियाकर्मियों को स्थायीकरण करना होगा के जोरदार नारों के साथ हजारों सहियाकर्मियों ने रविवार को राजभवन के समक्ष जोरदार प्रदर्शन किया। सहिया एवं सहिया साथी संघ के वैनर तले रविवार को धनबाद, बोकारो, चतरा, हजारीबाग, रांची, पूर्वी पश्चिमी सिंहभूम रामगढ़, देवघर, पलामू, पाकुड़, जामताड़ा समेत अन्य जिलों के हजारों सहियाकर्मियों ने विशाल रैली निकाल कर राजभवन पहुंचे। यहां अपने मानदेय और स्थायीकरण की मांग पर अपनी आवाज बुलंद की। इसकी अध्यक्षता संजू मिश्रा ने की, जबकि संचालन संतोष सोनी ने किया।
राजभवन के समक्ष आयोजित सभा को संबोधित करते हुए संघ के संरक्षक एवं मासस के पूर्व विधायक अरूप चटर्जी ने कहा कि सहिया बहनों को भीख की तरह प्रोत्साहन नहीं, देश के अन्य राज्यों की तरह बीस हजार रुपये मासिक मानदेय की सरकार गारंटी दे। इसे लागू करने में जो भी अड़चनें हों केंद्र और झारखंड की सरकार इसे दूर करें और फ्रंट लाइन वर्करों को बेहरत मानदेय और स्थायी की गारंटी हो। झारखंड में सिर्फ कंपनियों की चाकरी करने से काम नहीं चलेगा।
सहिया साथी संघ की अध्यक्ष पंपा मंडल ने कहा कि हम महिलाएं अबला नहीं चिंगारी हैं, महिला सशक्तिकरण के नाम पर महिलाओं के साथ नाइंसाफी बर्दाश्त नहीं करेंगे। सरकार की चाहे जो मजबूरी हो, हमारी मांगें पूरी हों, वरना सरकार को ही बुरे दिन देखना पड़ेगा। संघ की सचिव माया सिंह ने कहा कि सरकार की गलत नीतियों ने सभी सहिया बहनों को सड़क पर ला दिया है। सरकार कोरोना काल में फ्रंट लाइन वर्करों से किये वायदे पूरा करे। जब तक हमारी सेवा स्थायी नहीं, तब तक सरकार स्थिर नहीं रहेगी।
एक्टू के प्रदेश सचिव भुवनेश्वर केवट ने कहा कि जिन सहिया बहनों को दो-दो लड़ाकू भाइयों विनोद सिंह और अरूप चटर्जी का साथ हो, उसे कोई परास्त नहीं कर सकता है। हम मिल कर लड़के और बेहतर मजदूरी और स्थायीकरण की मांग ले के रहेंगे। राजभवन मार्च और सभा को चिंता देवी, प्रणव उपाध्याय, उदय मेहता, ललिता देवी, सोना साहू, आशा देवी, लक्ष्मी देवी, सीमा देवी, मुकुल भट्टाचार्य समेत कई वक्ताओं ने संबोधित किया।