राजधानी रांची के रोडकट का मुद्दा सरकार के लिए मुसीबत का सबब बन सकता है. पहले विरोधियों ने हमला बोला, अब जनता के साथ-साथ मंत्री को भी, कट्स को बंद करना, पसंद नहीं आ रहा है.
दरअसल विधानसभा स्थापना दिवस के दिन राज्यपाल और सीएम का काफिला जाम में फंस गया. जिसके बाद सीएम ने पुलिस पदाधिकारियों की क्लास लगा दी. जिसके बाद रातों रात राजधानी के सैकड़ों कट्स बंद कर दिये गए. सुबह होते ही लोग सड़क पर उतरकर प्रशासन की इस कार्रवाई का विरोध किया.
सरकार के इस फैसले पर विरोधियों ने सवाल खड़े किये. और अब सूबे के नगर विकास सह परिवहन मंत्री भी कुछ सवाल खड़े कर रहे हैं. मसलन
1.क्या कट्स बंद करने से जाम की समस्या का समाधान होगा.
2. जरुरत है तो ट्रैफिक में और मैन पावर को क्यों नहीं लगाया जा रहा.
3. ‘मुझसे ज्यादा रांची को कौन जानता, मुझसे राय क्यों नहीं ली गयी.’
4. सीएम ने जनता के प्रति संवेदनशीलता दिखायी, पर अधिकारियों ने वर्कप्लान क्यों नहीं बनाया.
5. ‘मैं सायरन वाली गाड़ी लेकर नहीं चलता, रोज जाम में फंसता हूं, पर मैंने कभी सवाल खड़े नहीं किये.’
नगर विकास मंत्री के ये सारे सवाल अधिकारियों से हैं, पर इन सवालों में निशाना माननीयों पर भी है. उधर सरकार के कट्स बंद करने के फैसले से राजधानी में जाम के हालात और बदतर हो गये हैं.