रांची। खनन लीज मामले में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को प्रवर्तन निदेशालय ने समन भेजा है। इससे झारखंड राज्य की सियासत गरम हो गयी है। इसी बीच बुधवार शाम सत्ता पक्ष की संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) की बैठक हुई। बैठक मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में कांके रोड स्थित सीएम आवास पर देर शाम तक चली। इसमें झामुमो, कांग्रेस और राजद कोटे के सभी मंत्री (जगरनाथ महतो को छोड़कर), विधायक उपस्थित थे। बैठक के बाद झामुमो विधायक सुदिव्य कुमार सोनू ने कहा कि राज्य के वर्तमान हालातों पर आज विशेष चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि आगामी 5 नवंबर को सभी जिला मुख्यालयों में सहयोगी दल विपक्ष के खिलाफ धरना देंगे। उन्होंने कहा कि आगामी 11 नवंबर को सरकार ने विधानसभा का एक विशेष सत्र आहूत किया है।
इस दौरान 1932 का स्थानीय नीति और ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण के प्रस्ताव को सदन से पास कर जनता को यह संदेश दिया जाएगा कि हेमंत सरकार राज्य के सभी वर्गों के हितों को ध्यान में रखकर काम कर रही है। बैठक में झामुमो से चंपई सोरेन, सीता सोरेन, रामदास सोरेन, जोबा मांझी, हाफिजुल अंसारी, बैद्यनाथ राम, सुदिव्य कुमार सोनू, निरल पूर्ति, मिथिलेश ठाकुर शामिल थे। कांग्रेस से शिल्पी नेहा तिर्की, कुमार जयमंगल सिंह, आलमगीर आलम, बन्ना गुप्ता, बादल पत्रलेख, डॉ रामेश्वर उरांव, उमाशंकर अकेला, भूषण बाड़ा, प्रदीप यादव सहित प्रदेश अध्यक्ष राजेश ठाकुर उपस्थित थे। राजद से सत्यानंद भोक्ता बैठक में शामिल थे। मंत्री बन्ना गुप्ता ने बताया कि बैठक में सर्वसम्मति से यह फैसला हुआ कि जिस तरह से विपक्ष साजिश के तहत सरकार को अस्थिर करने की कोशिश कर रहा है, उसका जवाब कानूनी तरीके से दिया जाएगा। झामुमो के विनोद पांडेय ने कहा कि यह सुनने में आ रहा है कि लोगों में जो आक्रोश है और पार्टी के कार्यकतार्ओं की जो भावना है वह स्वत: राजधानी पहुंच रहे हैं। यह सूचना हमें है, हम देखते हैं कि आगे क्या किया जाना चाहिए। विनोद पांडेय ने कहा कि अभी ऐसी कोई सूचना नहीं है कि मुख्यमंत्री गुरूवार को ईडी आॅफिस जाएंगे या नहीं उन्होंने कहा कि कानूनी सलाह ली जा रही है और कानून सम्मत जो बातें होगी वह किया जाएगा।