आजाद सिपाही संवाददाता
रांची। झामुमो के केंद्रीय महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा है कि दिशोम गुरु शिबू सोरेन के पुत्र हेमंत सोरेन ने लंबे संघर्ष को एक मुकाम तक पहुंचाने का काम किया। उन्होंने कहा कि यह कोई छोटी लड़ाई नहीं है। ये कोई छोटी मांग नहीं थी। इस बात के लिए इस राज्य को लंबा संघर्ष करना पड़ा है। इसके बाद से ही पहचान की लड़ाई शुरू हुई। वर्षों की लड़ाई को हेमंत सोरेन ने अमली जामा पहनाने का काम किया है। हमने सारे वायदों को पूरा किया है। सरकार लोगों तक पहुंचने लगी और लोगों से संवाद करना शुरू कर दिया है, तो विपक्ष के पेट में दर्द शुरू हो गया है।
सुप्रियो ने कहा कि सीएम ने विधानसभा से खतियान से आधारित जो हमारी पहचान है, उसे एक स्वरूप देने का काम किया है। यह राज्य जब अलग हुआ था, तब यहां के पिछड़ों के पास 27 प्रतिशत आरक्षण का अधिकार था। बाबूलाल मरांडी ने सरकार गठन करने के साथ-साथ 2001 में सुदेश महतो के सहयोग से 27 फीसदी आरक्षण को विलुप्त करते हुए 14 प्रतिशत करने का काम किया था उस गद्दारी को भी आज एक सबक मिला है और पुन: पिछड़ों को 27 प्रतिशत आरक्षण का संवैधानिक अधिकार मिला है। श्री भट्टाचार्य गुरुवार को पत्रकारों से बात कर रहे थे। उन्होंने कहा कि यहां के लोगों का पिछले वर्ष जो चिरलंबित मांग रही है सरना आदिवासी धर्म कोड में शामिल करने का, उसको भी पिछले 11 नवंबर को विधानसभा से पारित करने का काम किया गया। इसे हम लोग कह सकते हैं कि आगामी दिनों में झारखंड के साढ़े तीन करोड़ लोग 11 नवंबर को धर्म, संवाद, पहचान और अधिकार दिवस के तौर पर मनायें। अब हर वर्ष राज्य की जनता और पूरे देश में जितने भी आदिवासी और मूलवासी लोग हैं, उनके लिए यह शुभ दिन होगा और 11 नवंबर को धर्म, संवाद, पहचान और अधिकार दिवस के रूप में मनायेंगे।

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