इस बार किला फतह करने के लिए पूरा जोर लगा रही भाजपा
अतीत बहुत हद तक वर्तमान कैसा हो सकता है, इसका संकेत दे देता है। और विधानसभा चुनाव में संथाल की 16 सीटों पर नतीजे क्या आयेंगे, इसके कुछ संकेत वर्ष 2014 के विधानसभा चुनाव के नतीजों से मिलते हैं। बीती दफा भाजपा ने शिकारीपाड़ा के अलावा संथाल की सभी 15 सीटों पर चुनाव लड़ा था। चुनाव में भाजपा को आठ लाख 43 हजार 395 वोट मिले थे। चुनाव में भाजपा यहां की 16 में से पांच सीटें जीतने मेें सफल रही थी। वहीं भाजपा की प्रबल प्रतिद्वंद्वी रही झामुमो ने संथाल की सभी सीटों पर चुनाव लड़ा था और उसे छह सीटों पर जीत मिली थी। चुनाव में उसे आठ लाख 28 हजार 629 वोट मिले थे। इसी चुनाव में कांग्रेस ने 12 सीटों पर चुनाव लड़ा था और तीन सीटें जीतने में सफल रही थी। कांग्रेस ने यहां नाला, राजमहल, पोड़ैयाहाट और सारठ में प्रत्याशी नहीं उतारा था। पार्टी को यहां तीन लाख सात हजार 695 वोट मिले थे। राजद ने यहां छह सीटों पर प्रत्याशी उतारे थे और उसे 14 हजार 651 वोट मिले थे। बाबूलाल मरांडी की पार्टी झाविमो ने यहां जामताड़ा के अलावा सभी सीटों पर प्रत्याशी दिया था और उसे तीन लाख 42 हजार 938 वोट मिले थे। पार्टी यहां दो सीटों पर जीत हासिल करने में भी सफल रही थी। झाविमो के टिकट पर सारठ से जीते रणधीर सिंह बाद में भाजपा में शामिल हो गये थे और रघुवर सरकार में कृषि मंत्री बनने में भी सफल रहे थे।
हर दल ने झोंक दी है प्रचार में ताकत
संथाल में अधिक से अधिक सीटें जीतने की चाहत लिये हर दल ने चुनाव प्रचार में अपनी ताकत झोंक दी है। भाजपा को जहां मोदी मैजिक के सहारे यहां फिर मैजिक की उम्मीद है, वहीं हेमंत सोरेन को आदिवासियों की रहनुमाई का भरोसा है। बाबूलाल मरांडी यहां झारखंडी माटी को नमन करते हुए चुनाव प्रचार में लगे हैं, वहीं राहुल गांधी समेत कांग्रेस के स्टार प्रचारक भी यहां किसी से पीछे नहीं हैं। 15 दिसंबर को दुमका में आयोजित चुनावी सभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि झारखंड में जितनी भी चुनावी सभाएं की हैं, उनमें उमड़ी भीड़ पहले की रैलियों का रिकॉर्ड तोड़ देती हैं। इतने लोगों का हमें आशीर्वाद देने आना हमारा सौभाग्य है। जनसमर्थन दिखा रहा है कि झारखंड में भाजपा को और कमल के फूल को भरपूर समर्थन मिल रहा है। वहीं उनके भाषण से पहले अपने संबोधन में मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहा कि जब नारी शक्ति आगे बढ़ेगी, तभी राज्य और देश आगे बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि आधी आबादी को समाज हक दे इसके लिए सरकार काम कर रही है। उन्होंने कहा कि कमल समृद्धि का प्रतीक है। 20 दिसंबर को हर घर से कमल क्रांति हो यही अपील करता हूं। इसी तरह 14 दिसंबर को झारखंड की सभी 81 सीटों पर उम्मीदवार उतारकर नायक बने बाबूलाल मरांडी ने बरहेट के रांगा मैदान में पार्टी प्रत्याशी होपना टुडू के पक्ष में जनसभा को संबोधित किया। जब हर दल यहां चुनाव प्रचार में लगा हुआ है तो झामुमो कैसे पीछे रहता। पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन ने भी यहां चुनाव प्रचार में अपनी तथा पार्टी की पूरी ताकत लगा दी है। शिकारीपाड़ा में रविवार को आयोजित एक सभा में हेमंत ने कहा कि झारखंड का स्वाभिमान तीर-कमान झारखंड और झारखंडियत की रक्षा करेगा। हेमंत सोरेन संथाल में दो सीटों दुमका और बरहेट से लड़ रहे हैं और इन दोनों सीटों पर उन्हें मात देने के लिए भाजपा दिन-रात एक कर रही है। इन सीटों पर पार्टी प्रत्याशियों को बढ़त मिले, इसलिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुमका में 15 सितंबर को चुनावी सभा को संबोधित किया। उनकी अगली सभा 17 को बरहेट में है। वहीं हेमंत भी यहां बीते कई दिनों से कैंप किये हुए हैं और उन्हें चुनौती देने के लिए भाजपा ने अपने चुनाव प्रचार का सारा काम रांची से संथाल शिफ्ट कर दिया है।
आजसू ने अकील को पाले में कर उम्मीद जगायी
संथाल सीट पर अपनी धमक मजबूत करने में जुटी आजसू पार्टी ने यहां झामुमो के टिकट पर पाकुड़ से विधायक रह चुके अकील अख्तर को पार्टी में शामिल कराकर तथा उन्हें इस सीट से प्रत्याशी बनाकर जहां झामुमो को झटका दिया है, वहीं यहां के सीटिंग विधायक और कांग्रेस विधायक दल के नेता आलमगीर आलम के सामने भी चुनौती पेश की है। आजसू की एक और प्रत्याशी स्टेफी टेरेसा मुर्मू झामुमो की विधायक सीता सोरेन के समक्ष जामा में चुनौती पेश कर रही हैं। आजसू के पास संथाल में खोने के लिए कुछ नहीं है, पर हासिल करने के लिए बहुत कुछ है। उसके संथाल में दबिश देने से संथाल में झाविमो और झामुमो के वोट बैंक पर कहीं न कहीं असर पड़ेगा और इसका फायदा भाजपा को मिल सकता है। झारखंड की राजनीति के जानकारों का कहना है कि इसमें कोई संदेह नहीं है कि संथाल झामुमो का किला रहा है, पर यह भी निर्विवाद है कि इसमें भाजपा ने सेंधमारी कर ली है। दुमका से झामुमो सुप्रीमो शिबू सोरेन का लोकसभा चुनाव हारना और बीते विधानसभा चुनाव में दुमका से ही हेमंत सोरेन की लुईस मरांडी के हाथों पराजय से यह जरूर साफ हो गया है कि झामुमो पूरी तरह अजेय नहीं है। पांचवें चरण में संथाल में जहां भाजपा के दो मंत्रियों लुईस मरांडी और रणधीर सिंह के सामने अपनी सीट बचाने की चुनौती है, वहीं हेमंत सोरेन के सामने दुमका से अपनी और शिबू सोरेन की हार का बदला लेने और बरहेट सीट पर कब्जा बरकरार रखने की चुनौती है। भाजपा ने इस क्षेत्र में विकास की जो योजनाएं चलायी हैं, उसकी बदौलत यह संदेश देने की कोशिश कर रही है कि संथाल का हित सबसे बेहतर वही समझती है। देवघर को एम्स दिलाया है तो दुमका में मेडिकल कॉलेज। साहेबगंज में गंगा पर पुल और बंदरगाह को भी भाजपा सरकार अपनी बड़ी उपलब्धियों के तौर पर भुनाना चाहती है। वहीं कांग्रेस की बात करें तो यहां वह तीसरा कोण बनाना चाहेगी। बीते चुनाव में कांग्रेस ने यहां से पाकुड़, जामताड़ा और जरमुंडी सीट जीती थी। वहीं लिट्टीपाड़ा और महगामा में भी कांग्रेस उम्मीदवार को दस हजार से अधिक वोट मिले थे। इस बार के चुनाव में भी कांग्रेस ने जामताड़ा में डॉ इरफान अंसारी, पाकुड़ में आलमगीर आलम और जरमुंडी में सीटिंग विधायक बादल पत्रलेख पर दांव खेला है।