आजाद सिपाही संवाददाता
रांची। अगर आप कोयला तस्करी करना चाहते हैं, तो हजारीबाग के बड़कागांव थाना क्षेत्र में चले जाइये। वहां इन दिनों कोयले की चोरी नहीं, लूट मची हुई है। दिन-रात खदान से कोयला लोड कर सुरक्षित ठिकानों तक ले जाया जा रहा है और फिर वहां से उसे बनारस समेत दूसरी मंडियों में भेजा जा रहा है। बीच में इस धंधे पर विराम लगा था, लेकिन पिछले पांच दिनों से यह कारोबार अचानक शुरू हो गया। इस धंधे से जुड़े लोगों का कहना है कि सिग्नल मिलने के बाद धंधा शुरू किया गया है, जो अब बिना रोक-टोक के चलेगा। पुलिस केवल उस गाड़ी को रोकती है, जिसका मालिक सेटिंग नहीं कर पाया हो या तय राशि का भुगतान नहीं कर सका हो।
ऐसे चलता है पूरा कारोबार
जानकारी के अनुसार, कुंदनपुरा और मोहरा की खदानों से कोयला निकाला जा रहा है। इसे पहाड़ पर चढ़ाया जाता है। वहां कोल डंप बनाया गया है। फिर यहां से ट्रकों से कटकमदाग के रास्ते मंडियों में भेजा जा रहा है। इस धंधे में करीब पांच सौ मजदूर लगे हुए हैं और कोई बड़ी दुर्घटना कभी भी हो सकती है। ऊपर के अधिकारियों को इसकी जानकारी है या नहीं, इसकी पक्की जानकारी नहीं है, लेकिन कुंदनपुरा से ही कुछ ट्रक चरही के रास्ते हजारीबाग की ओर भेजे जा रहे हैं। इस धंधे में शामिल अधिकांश लोग बिहार और उत्तर प्रदेश के हैं। कोयला स्थानीय र्इंट भट्ठों में भी खपाया जा रहा है। इस काम के लिए ट्रैक्टर उपलब्ध हैं।
क्या है रेट
बड़कागांव और कटकमदाग पुलिस को 30-30 हजार रुपये प्रति टर्बो के हिसाब से दिया जाता है, वहीं वन विभाग 10 हजार रुपये प्रति टर्बो ले रहा है।
केरेडारी के कुछ इलाके से भी तस्करी
हजारीबाग के केरेडारी थाना क्षेत्र के हेंदेगीर इलाके से भी ट्रक उसी कोयले की तस्करी हो रही है, जो बुढ़मू के रास्ते निकलता है। अनुमान के अनुसार 10 से 15 ट्रक कोयला इस रास्ते से निकलता है।
कोयला तस्करों के लिए मुफीद इलाका है बड़कागांव
पूरे थाना क्षेत्र में बेरोक-टोक चलता है गैर-कानूनी धंधा