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    Home»विशेष»देश भर के हवाई अड्डों पर हाहाकार के लिए जिम्मेवार कौन
    विशेष

    देश भर के हवाई अड्डों पर हाहाकार के लिए जिम्मेवार कौन

    shivam kumarBy shivam kumarDecember 7, 2025Updated:December 7, 2025No Comments9 Mins Read
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    इंडिगो संकट से यात्री परेशान, दूसरे एयरलाइन्स का किराया 10 गुणा जादा
    -4 दिन में 1200 से ज्यादा फ्लाइट्स कैंसिल, दूल्हा-दुल्हन से लेकर मरीज परेशान
    -अस्थियां भी कर रहीं इंतजार, किसी की नौकरी गयी तो किसी की बरसों की मेहनत बेकार
    भारत के हवाई अड्डों पर हाहाकार मचा हुआ है। दिल्ली, मुंबई, हैदराबाद, अहमदाबाद और बेंगलुरु जैसे बड़े शहरों के साथ छोटे-छोटे हवाई अड्डों पर भी अफरा-तफरी मची हुई है। रांची भी इससे अछूता नहीं है। देश की सबसे बड़ी निजी विमानन कंपनी इंडिगो के साथ पैदा हुआ यह संकट इतना गंभीर हो गया है कि हवाई यात्रियों का भरोसा विमानन कंपनियों पर से कम होता जा रहा है। वास्तव में यह चिंताजनक स्तर तक पहुंच गया है। पिछले तीन दिनों में इंडिगो की करीब एक हजार उड़ानें रद्द कर दी गयी हैं और हवाई अड्डों पर हजारों यात्री 12 से लेकर 24 घंटे से इंतजार के साथ गुहार लगा रहे हैं, लेकिन उनकी सुननेवाला कोई नहीं है। सबसे सुरक्षित और सुखद मानी जानेवाली विमान यात्रा अब भयावह अनुभव लेकर सामने आ रही है। लोगों को चिकित्सा, नौकरी की इंटरव्यू और शादी-विवाह से लेकर दूसरे जरूरी काम में बाधाएं आने लगी हैं। इंडिगो के जारी संकट ने देश भर के यात्रियों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। कर्नाटक के हुबली में एक नवविवाहित जोड़े को अपना रिसेप्शन वीडियो कॉल के जरिए अटेंड करना पड़ा, तो बेंगलुरु एयरपोर्ट पर एक महिला अपने पिता की अस्थियां लेकर हरिद्वार पहुंचने की गुहार लगा रही हैं।

    कई हवाई अड्डों पर तो स्थिति बेकाबू होने की भी खबरें हैं। इंडिगो ने स्टाफ की कमी को इस पूरी आफत की मुख्य वजह बताया है। हवाई यात्रियों का कहना है कि कोई भी कुछ बताने की स्थिति में नहीं है। हालत कितनी खराब है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि हर दिन 2200 से अधिक उड़ानें संचालित करनेवाली कंपनी इंडिगो की केवल 35 फीसदी उड़ानें दो दिसंबर को और 20 फीसदी उड़ानें तीन दिसंबर को संचालित की जा सकीं। यहां सवाल पैदा होता है कि इस बदइंतजामी का जिम्मेवार कौन है और विमान यात्रियों की समस्या कब तक हल होगी। अब तक इन सवालों का जवाब नहीं मिला है। यदि जल्द ही इन सवालों का जवाब नहीं मिला, तो स्थिति विस्फोटक हो सकती है। वहीं दूसरी एयरलाइन के किराए में उछाल देखने को मिला है। यात्रियों को आॅप्शनल फ्लाइट्स की तलाश में सामान्य से 5 से 10 गुणा जादा कीमत पर टिकट खरीदने पड़ रहे हैं। बुकिंग साइट मेक माइ ट्रिप के अनुसार, 6 दिसंबर को दिल्ली से बेंगलुरु की सबसे सस्ती फ्लाइट का किराया 40 हजार रुपए से ज्यादा है, जबकि कुछ फ्लाइट्स का किराया 80 हजार रुपए तक हैं। क्या है इंडिगो संकट का कारण और कब तक हो सकता है इसका समाधान, बता रहे हैं आजाद सिपाही के संपादक राकेश सिंह।

    पूरा देश पिछले तीन दिनों से एक अजीब से संकट में फंसा हुआ है। देश भर के हवाई अड्डों पर हाहाकार मचा हुआ है। उड़ानें लगातार रद्द हो रही हैं। देश की सबसे बड़ी विमानन कंपनी इंडिगो की 70 प्रतिशत से अधिक उड़ानें रद्द हो गयी हैं। स्थिति इस कदर बिगड़ चुकी है कि लाखों यात्री हवाई अड्डों पर 12 से 24 घंटे से फंसे हुए हैं। किसी को चिकित्सा के लिए जाना है, तो किसी को नौकरी का इंटरव्यू छूट गया है। कोई शादी करने के लिए घर जाना चाहता है, तो किसी का रिसेप्शन है। किसी के घर में हादसा हो गया है, तो किसी को दूसरा जरूरी काम है, लेकिन कहीं किसी की सुनवाई नहीं हो रही है। हजारों रुपये का टिकट हाथ में होने के बावजूद विमान यात्रियों का दिन-रात हवाई अड्डों की फर्श पर बीत रहा है। देश के प्रमुख हवाई अड्डों पर यात्रियों का गुस्सा फूट पड़ा है। दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, पुणे और हैदराबाद जैसे प्रमुख हवाई अड्डों पर यात्रियों की लंबी कतारें लग गयीं और हजारों लोग फंसकर परेशान हो रहे हैं। देश के हवाई अड्डों पर मचे इस हाहाकार के लिए जिम्मेवार कौन है और विमान यात्रियों की समस्या का समाधान कब होगा, इसकी कोई जानकारी नहीं है। यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है।

    समस्या क्यों बड़ी है
    दरअसल इंडिगो के सामने यह समस्या साल के सबसे व्यस्त यात्रा समय पर आयी है, जब भारत में हर दिन पांच लाख या उससे अधिक घरेलू यात्री सफर कर रहे हैं। इंडिगो का घरेलू बाजार में 60% से अधिक हिस्सा है। ऐसे में जब उसकी 65% उड़ानें एक ही दिन देरी से चलें, तो इसका असर आसानी से समझा जा सकता है। ऐसी देरी का वास्तविक असर लंबे समय तक उड़ानों को प्रभावित करता रहता है।

    1200 से अधिक उड़ानें रद्द
    भारत सरकार का नियामक निकाय नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने कहा कि इंडिगो की नवंबर में 1,232 उड़ानें रद्द की गयीं, जिनमें से 755 उड़ानें क्रू और एफडीटीएल नियमों की वजह से रद्द हुईं हैं। एटीसी सिस्टम फेलियर (92), एयरपोर्ट/एयरस्पेस प्रतिबंध (258) और अन्य कारणों से 127 उड़ानें रद्द करनी पड़ीं।

    डीजीसीए नियमों से परेशानी
    कहा जाता है कि इंडिगो एयरलाइन पिछले महीने से लागू हुए नए फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन (एफडीटीए) नियमों के बाद से तेजी से बढ़ती पायलट की कमी का सामना कर रही है। ये नये नियम क्रू के लिए अधिक मानवीय और आरामदायक रोस्टरिंग सुनिश्चित करते हैं। कई एयरपोर्ट अधिकारियों का कहना है कि इंडिगो की देरी और रद्द उड़ानें बड़े पैमाने पर संचालन में बाधा पैदा कर रही हैं और स्थिति लगातार चुनौतीपूर्ण बनी हुई है।

    एफडीटीएल क्या है?
    भारत में डीजीसीए जैसी नियामक संस्था फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन (एफडीटीए) के मानक को लागू करते हैं। यह एक तरह की उड़ान ड्यूटी समय सीमाएं, जो अधिकतम उड़ान घंटे, ड्यूटी अवधि और न्यूनतम आराम की आवश्यकताएं तय करके विमान चालक दल की थकान को रोकने के लिए बनाये गये नियम हैं। ये नियम सुनिश्चित करते हैं कि उड़ान चालक दल के सदस्यों को संचालन के दौरान सुरक्षा और दक्षता बनाये रखने के लिए पर्याप्त आराम मिले।

    स्टाफ की कमी या कुछ और
    एयरपोर्ट के एक अधिकारी ने बताया कि क्रू की भारी कमी के कारण उड़ानें लगातार देरी से चल रही हैं। कुछ उड़ानों में तो केबिन क्रू ही उपलब्ध नहीं था। इसलिए उन्हें रद्द करना पड़ा। एयरलाइन क्रू को अलग-अलग बेस पर भेजकर उड़ानें संचालित करने की कोशिश कर रही है, लेकिन कमी इतनी गंभीर है कि हालात काबू से बाहर हो गये हैं। उन्होंने कहा कि कौन सोच सकता था कि इंडिगो जिसकी पहचान ही समय पर उड़ान (ओटीएफ) है, उसकी ओटीपी 19.7% तक गिर जायेगी। सूत्रों के अनुसार तीन दिनों के भीतर इंडिगो की 1200 से अधिक उड़ानें रद्द की गयी हैं, जबकि कई उड़ानें सात से आठ घंटे की देरी से चल रही हैं।

    कई अन्य कारण भी सामने आये हैं
    डीजीसीए के नये नियमों के अलावा उड़ानों में देरी के कई अन्य कारण भी सामने आये हैं। दिल्ली और पुणे जैसे बड़े हवाई अड्डों पर चेक-इन और डिपार्चर कंट्रोल सिस्टम में तकनीकी समस्याएं आयीं। इससे सुबह की उड़ानें पीछे खिसक गयीं और देरी का यह प्रभाव पूरे दिन नेटवर्क में फैलता गया। इसके अलावा सर्दियों के मौसम में धुंध, बढ़ी हुई यात्री संख्या और पीक आवर की भीड़ ने हालात और खराब कर दिये। इंडिगो की तंग शेड्यूलिंग के कारण छोटी देरी भी पूरे नेटवर्क में लहर की तरह असर डालती है।

    इंडिगो ने बतायी समस्या की वजह
    इंडिगो एयरलाइंस ने इस समस्या को लेकर आधिकारिक बयान भी जारी किया है। इंडिगो की प्रवक्ता ने कहा कि पिछले तीन दिनों से हमारी उड़ानों में काफी देरी और गड़बड़ियां हुई हैं, जिसके लिए कंपनी अपने सभी यात्रियों से माफी मांगती है। कई संचालन चुनौतियों, जैसे छोटी तकनीकी दिक्कतें, सर्दियों की वजह से बदला हुआ शिड्यूल, खराब मौसम, हवाई यातायात में बढ़ा दबाव और नये क्रू रोस्टरिंग नियम की वजह से बड़ी समस्या का सामना करना पड़ा, जिसका असर उड़ानों पर देखने को मिला है। इंडिगो ने कहा कि स्थिति को संभालने के लिए हम अगले 48 घंटों के लिए उड़ान शिड्यूल में कुछ बदलाव किये हैं, ताकि संचालन जल्दी सामान्य हो सके और समय पर उड़ानें फिर से शुरू की जा सकें। टीम लगातार काम कर रही है, ताकि यात्रियों को कम से कम परेशानी हो। जिन यात्रियों की उड़ानें प्रभावित हुई हैं, उन्हें नयी यात्रा व्यवस्था या जरूरत पड़ने पर रिफंड दिया जा रहा है।

    देश की सबसे बड़ी विमानन कंपनी है इंडिगो
    इंडिगो देश की सबसे बड़ी एयरलाइन है। देश का 60 फीसदी से ज्यादा मार्केट इसी कंपनी के पास है, लेकिन पिछले कुछ दिनों से इसकी स्थिति ठीक नहीं है। इंडिगो की सैकड़ों उड़ानें रद्द हो चुकी हैं। यह कंपनी हर दिन 2200 से अधिक उड़ानें संचालित करती है। पिछले तीन दिन में इसमें से 20 से 30 फीसदी उड़ानें ही संचालित की जा सकी हैं। इनमें से भी 70 फीसदी से अधिक उड़ानें चार से 10 घंटे की देरी से संचालित हुई हैं।

    क्या कर रही है सरकार
    इंडिगो की सैकड़ों उड़ानों के कैंसिल होने के बीच सरकार का बयान आया है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय का कहना है कि मंत्री राम मोहन नायडू के निदेर्शों के बाद इंडिगो की उड़ानों के कैंसिलेशन और देरी के मामले पर चौबीसों घंटे नजर रखी जा रही है। नायडू ने मंत्रालय के कंट्रोल रूम का दौरा किया। उन्होंने वहां के कामकाज की समीक्षा की। उन्होंने सभी संबंधित पक्षों के साथ तालमेल बिठाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि यात्रियों को समय पर जानकारी देना भी महत्वपूर्ण है।

    डीजीसीए ने दी राहत
    इस बीच डीजीसीए ने एफडीटीएल नियम में ढील दी है। क्रू मेंबर को वीकली रेस्ट का नियम वापस ले लिया गया है। यह तत्काल प्रभाव से लागू होगा। देश भर में इंडिगो की सैकड़ों फ्लाइट कैंसिल होने के बाद डीजीसीए ने यह फैसला लिया है। डीजीसीए ने कहा, आॅपरेशनल दिक्कतों और विभिन्न एयरलाइनों से मिले सुझावों को देखते हुए पिछले निर्देश को तुरंत प्रभाव से वापस लिया जाता है। इसमें कहा गया था कि साप्ताहिक आराम की जगह कोई छुट्टी नहीं ली जा सकती।

    डीजीसीए के पायलट उड़ायेंगे इंडिगो के विमान
    इधर डीजीसीए ने अपने निरीक्षकों को इंडिगो के लिए उड़ानें संचालित करने का आदेश दिया है। डीजीसीए पांच साल के अनुबंध पर पायलटों को नियुक्त करता है। इस दौरान वे आॅडिटर के तौर पर काम करते हैं और किसी भी एयरलाइन के लिए उड़ान भरने से रोके जाते हैं।

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