लोहरदगा। हेमंत सोरेन की बदलाव यात्रा रविवार को लोहरदगा पहुंची। इस दौरान उन्होंने कहा कि राज्य में जंगल, जमीन और…
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न दिन को सुकुन है और न रात को सुकुन। गीत का यह मुखड़ा झारखंड के नेताओं की वर्तमान चुनावी हालत बखूबी बयां कर रहा है। हाल यह है कि चाहे वह मुख्यमंत्री रघुवर दास हों या झामुमो के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन या फिर आजसू सुप्रीमो सुदेश महतो या झाविमो सुप्रीमो बाबूलाल मरांडी सबके सब चुनाव की तैयारियों में खुद को इतना झोंक चुके हैं कि उनका दिन और रात क्षेत्र या फिर कार्यकर्ताओं से संवाद करने में ही बीत रहा है। कमोबेश यही हालत कांग्रेस और राजद की है। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष रामेश्वर उरांव पार्टी को मुकाबले में खड़ा करने के लिए जी तोड़ प्रयास कर रहे हैं पर अपनी ही पार्टी के साथियों का हमलावर होना उनके लिए मुश्किल खड़ा कर रहा है। झारखंड में राजद दो फाड़ हो चुकी है और इसके सामने चुनौतियां नहीं चुनौतियों का पहाड़ खड़ा है। कुल मिलाकर चुनावों से पहले नेताओं के लिए यह समय बेहद विकट साबित हो रहा है। विधानसभा चुनावोें से पहले पक्ष और विपक्ष के नेताओं की चुनौतियों और चुनावी समर में उनकी हालत को रेखांकित करती दयानंद राय की रिपोर्ट।
आजाद सिपाही संवाददाता रांची। झारखंड में पिछड़ों की लड़ाई लड़ने में कोई पार्टी अगुवा रही है तो वह आजसू रही…
गया । पूरे विश्व में इन दिनों आर्थिक मंदी को लेकर हर क्षेत्र में चर्चा हो रही है मगर पितृपक्ष मेले…
सखी मंडल की महिलाओं ने पाकुड़ में सीएम से की मुलाकात
जेपीएससी फर्स्ट और सेकेंड बैच के हैं अधिकारी, सीबीआइ जल्द अपनी रिपोर्ट सौंपेगी हाइकोर्ट को
मेदिनीनगर। बदलाव यात्रा के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने शिवाजी मैदान में कहा कि खनिज संपदा से भरपूर होते…
आज से तीन दशक पहले जब झारखंड आंदोलन उफान पर था, आॅल झारखंड स्टूडेंट्स यूनियन या आजसू को इस आंदोलन का युवा चेहरा माना जाता था। झारखंड अलग राज्य बनने के बाद 19 साल में इस संगठन के राजनीतिक अवतार ने कई उतार-चढ़ाव देखे, लेकिन इसने अपनी पहचान को कभी नेपथ्य में नहीं जाने दिया। संघर्ष और प्रतिबद्धता की बदौलत इसने हर दिन राजनीति का नया मुकाम हासिल किया है। स्पष्ट विजन, मुद्दों की समझ और जनता के बीच जाकर राजनीति करने का माद्दा रखनेवाले आजसू को आज झारखंड की बड़ी ताकत माना जाता है, तो इसके पीछे इसके नेताओं-कार्यकर्ताओं का बलिदान शामिल है। झारखंड बनने के बाद महज दो विधानसभा सीटों से चुनावी राजनीति करनेवाली इस पार्टी ने आज राज्य की कम से कम 20 सीटों पर अपना जनाधार बना लिया है। इन सीटों पर आजसू चुनाव परिणाम को प्रभावित करने की स्थिति में है। यही कारण है कि दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी भाजपा भी अपने इस सहयोगी पर आंख बंद कर भरोसा करती है, उसे अपनी कामयाबी के सफर का हमसफर बताती है। आजसू के इस विस्तार के पीछे पार्टी नेतृत्व का बड़ा हाथ माना जाता है। आखिर आजसू ने ऐसा क्या किया कि झारखंड के सबसे पुराने और ताकतवर राजनीतिक दल झामुमो को रक्षात्मक रुख अख्तियार करना पड़ रहा है। आजसू के विस्तार के कारणों की पड़ताल करती आजाद सिपाही पॉलिटिकल ब्यूरो की विशेष रिपोर्ट।
सीसीएल के अफसरों और पुलिस की मौजूदगी में होती थी पिपरवार में वसूली
दुमका/शिकारीपाड़ा/ मारसडगा/पाकुड़/महेशपुर। सीएनटी और एसपीटी एक्ट का सबसे ज्यादा उल्लंघन झारखंड मुक्ति मोर्चा ने किया। गरीब और भोले-भाले आदिवासियों की…
अबकी बार 65 पार की पड़ी बुनियाद