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    Home»विशेष»योगी राज में कांप रहा आतंक
    विशेष

    योगी राज में कांप रहा आतंक

    azad sipahiBy azad sipahiSeptember 3, 2021No Comments11 Mins Read
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    22 हजार से ज्यादा अपराधियों का साम्राज्य ध्वस्त, 1584 करोड़ की संपत्ति जब्त

    उत्तरप्रदेश में गुंडे या तो जेल के अंदर हैं या फिर उनका राम नाम सत्य हो गया है। जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भरी सभा में ये बातें कही थीं, तो सिर्फ लोगों की तालियां बटोरने के लिए नहीं, बल्कि इसमें पूरी सच्चाई भी थी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जैसे ही उत्तरप्रदेश की कमान संभाली, उन्होंने अपराध को लेकर जीरो टॉलरेंस की नीति पर चलने का एलान कर दिया। आज उत्तरप्रदेश का हर अमनपसंद लोग इस सच से वाकिफ हैं कि अपराधी या तो जेल के अंदर हंै या फिर प्रदेश के बाहर कहीं मुंंह छुपा कर बैठे हुए हैं। आज से लगभग चार साल पहले तक उत्तरप्रदेश की स्थिति इसके बिल्कुल उलट थी। राज्य सरकार के हुक्मरान अपराधियों का स्वागत मेहमान की तरह करते थे। उन्हें दुलार-पुचकार मिलता था। वे राज्य की दशा और दिशा तय करते थे। उत्तरप्रदेश के लगभग दो दर्जन जिले पूरी तरह से अशांत हो गये थे। मऊ, आजमगढ़, अलीगढ़, सहारनपुर, बदायूं, मेरठ सरीखे जिलों में अगर साल-छह महीने के अंदर सांप्रदायिक सौहार्द्र नहीं बिगड़ता था, तो आश्चर्य होता था। अपराधियों का मनोबल कितना बढ़ा हुआ था, आप इसका अंदाजा इसी बात से लगा सकते हैं कि 2014 के चुनाव प्रचार में अपराधियों ने मऊ में नरेंद्र मोदी को निशाने पर लेने के लिए पूरी योजना बना ली थी। वह तो समय रहते सुरक्षा एजेंसियों के चौकस रहने के कारण कोई अघटन नहीं हुआ। मऊ, आजमगढ़, अलीगढ़, बरेली, सहारनुपर में तो सभ्य लोगों का सड़कों पर निकलना मुश्किल हो गया था। यहां के एक खास तबके के दुकानदार हर समय दहशत में जी रहे थे। आये दिन सुनने में आता था कि दंगा हो गया है। आज यहां, कल वहां। आये दिन बलात्कार, हत्या, लूट, डकैती की खबरें चिल्ला-चिल्ला कर कानून व्यवस्था की पोल खोल रही थीं। उत्तरप्रदेश का बच्चा-बच्चा जानता था कि राज्य का माफिया कौन है। माफियाओं का रुतबा इतना बढ़ गया था कि उन्हें खुश करने के लिए कशीदे काढ़े जाते थे। उनकी बाहुबल की गाथाएं उनके समर्थक चटखारे लेकर सुनाते थे। लेकिन आज उत्तरप्रदेश में अपराधियों की खैर नहीं। योगी सरकार में अपराधियों के सीखंचों में बद होने, कुछ की सांसें थमने और बाकी के ठंडे पड़ते लहू पर आजाद सिपाही के विशेष संवाददाता राकेश सिंह की विशेष पेशकश।

    गाजीपुर जिला से बीस किलोमीटर दूर है यूसुफपुर-मोहम्मदाबाद। यहीं के रहनेवाले हैं मुख्तार अंसारी और अफजाल अंसारी। मुख्तार अंसारी के नाम से लोग कांपते थे। गाजीपुर, मऊ, बलिया, गाजीपुर या आजमगढ़ और वाराणसी के किसी कारोबारी या ठेकेदार के पास उसका या उसके गुर्गों का फोन चला जाता था, तो लोगों की दिल की धड़कन बढ़ जाती थी। उससे मिलने के लिए लोग संपर्क सूत्र ढूंढ़ने लगते थे। पूर्वांचल में इस नाम का खौफ इस कदर था कि उन इलाकों की सड़कें भी बनने से इंकार कर दिया करती थीं। इसे अगर देखना हो, तो आप यूसुफपुर से करीमुद्दीनपुर की तरफ सड़क मार्ग से जाइये। 30 साल से भी अधिक वक़्त हो गया, कोई भी सरकार या प्रशासन उस सड़क को बनवा नहीं सका। आज भी वह सड़क उसी हालत में है। किसी भी ठेकेदार या प्रशासन की हिम्मत नहीं है कि वह बगैर रंगदारी दिये काम श्ुारू करवा दे और रंगदारी भी इतनी कि सड़क क्या पगडंडी बनाने के लिए भी पैसे नहीं बचेंगे। यह सड़क आज भी मुख्तार के आतंक के गड्ढों से भरी पड़ी है। गांववाले कहते हैं, कायदा न कानून सही, मुख्तार जो परसेंटेज मांगे, वही सही। गाजीपुर से ही मुख्तार का भाई अफजाल अंसारी सांसद हैं।

    कृष्णानंद राय का नाम पूर्वांचल में कौन नहीं जानता था। जो भी नहीं जानता था, वह एके 47 की 500 राउंड गोलियों की तड़तड़ाहट से जान गया था। वह साल 2005 की 29 नवंबर की शाम थी। कृष्णानंद राय भांवरकोल ब्लॉक के सियाड़ी गांव में आयोजित एक स्थानीय क्रिकेट प्रतियोगिता में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए थे। वह मैच का उद्घाटन कर जब अपने गांव वापस आ रहे थे, तभी बसनिया चट्टी के पास पहले से घात लगाये आतंकियों ने उनके काफिले पर आॅटोमैटिक रायफल एके-47 से गोलियों की बौछार कर दी। कृष्णानंद राय के काफिले पर करीब 500 राउंड गोलियां दागी गयी थीं। पूरा इलाका थरथरा गया था। पहले हर तरफ धुआं-धुआं और उसके थोड़ी देर बाद धरती खून के छीटों से सन गयी थी। विधायक कृष्णानंद राय समेत कुल सात लोगों की निर्मम हत्या कर दी गयी। मारे गये सातों लोगों के शरीर से कुल 67 गोलियां निकाली गयी थीं। कृष्णानंद राय बुलेटप्रूफ गाड़ी में चलते थे। लेकिन हमला वाले दिन वह नॉन-बुलेटप्रूफ गाड़ी से जा रहे थे। इस बात की जानकारी आतंकियों को पहले से ही थी। मुख्तार अंसारी की एक खास रणनीति होती थी। जब भी बड़ा कांड होनेवाला होता था, वह किसी केस में जेल में बंद हो जाता था। इस हत्याकांड के समय भी मुख्तार अंसारी जेल में बंद हो गया था, लेकिन इस हत्याकांड का मास्टरमाइंड वही था। इस हत्याकांड में अफजाल अंसारी, माफिया डॉन मुख्तार अंसारी, डॉन मुन्ना बजरंगी, अताउर रहमान उर्फ बाबू, संजीव महेश्वरी उर्फ जीवा, फिरदौस, राकेश पांडेय उर्फ हनुमान, मोहम्मदाबाद नगर पालिका चेयरमैन एजाजुल हक सहित अन्य लोगों को आरोपी बनाया गया था। दरअसल, 2002 में कृष्णानंद राय मुख्तार अंसारी के भाई अफजाल अंसारी को मोहम्दाबाद विधानसभा सीट से हरा कर विधायक बने थे। कृष्णानंद राय ही वह शख्स थे, जिन्होंने 2002 में अफजाल अंसारी को हरा कर भाजपा का उस सीट से खाता खोला था। हत्याकांड के विरोध में लगभग एक पखवारे तक गाजीपुर, बलिया, आजमगढ़, वाराणसी में आंदोलनों का दौर चलता रहा। कृष्णानंद राय की हत्या के बाद आंदोलन की कमान भाजपा नेता राजनाथ सिंह संभाले हुए थे। तत्कालीन सपा की मुलायम सरकार इस हत्या की जांच प्रदेश की एजेंसी से करवाना चाहती थी और भाजपा सीबीआइ से जांच करवाने पर अड़ी हुई थी। राजनाथ सिंह हत्या की जांच सीबीआइ से करवाने के लिए वाराणसी जिला मुख्यालय में आमरण अनशन पर बैठ गये। अटल बिहारी वाजपेयी खुद वाराणसी पहुंचे और न्याय यात्रा को रवाना किया था। अटल बिहारी ने यहां तक कह दिया था कि अब यूपी में निर्णायक जंग होगी। हत्याओं का तांता लग गया है, जंगल राज हो गया है। जान की कोई कीमत नहीं रह गयी है। यह सरकार रहेगी तो हत्याएं होती रहेंगी। अब परिवर्तन का समय आ गया है। इस हत्याकांड ने गाजीपुर के राजनीतिक मंजर को बदल डाला था। इस हत्याकांड के बाद स्वर्गीय राय की पत्नी अलका राय मोहम्दाबाद सीट पर हुए उपचुनाव में एमएलए बन गयीं। मुख्तार के बड़े भाई अफजाल ने विधायकी लड़ना बंद कर सांसदी लड़ना शुरू कर दिया। वर्तमान में भी मोहम्दाबाद सीट से स्वर्गीय कृष्णानंद राय की पत्नी अलका राय विधायक हैं। ये किस्सा तो सत्ता और माफिया के गठजोड़ का ट्रेलर मात्र था। मुख्तार का आतंक इस कदर था कि कृष्णानंद राय की हत्या के बाद उनके पांच दर्जन से अधिक कट्टर समर्थकों ने इलाका छोड़ दिया था। डर के मारे उनके समर्थकों ने अपने सिर की टिक्की कटवा ली थी। बतों कि कृष्णानंद राय के समय में उनके कट्टर समर्थकों ने टिक्की रखी थी। यही उन लोगों की पहचान बन गयी थी। राय की हत्या के बाद मुख्तार के गुर्गों ने उन समर्थकों को चुन-चुन कर मारना शुरू कर दिया। लिहाजा वे इलाका छोड़ पलायन कर गये। अपराधियों की एक तरह से पूर्वी उत्तरप्रदेश में समानांतर सत्ता के बाद लोगों के लिए सुखद सवेरा आया। पहले 2014 के चुनाव में भाजपा केंद्र में सत्ता में आयी और उसके बाद 2017 के विधानसभा चुनाव में सत्ता परिवर्तन हो गया। भाजपा बहुमत में आयी और राज्य की कमान योगी आदित्यनाथ के हाथों सौंप दी गयी। मुख्यमंत्री की कुर्सी संभालते ही आदित्यनाथ ने उत्तरप्रदेश से अपराध खत्म करने का बीड़ा उठाया। इसके तहत मुख्यमंत्री ने मिशन जीरो टॉलरेंस के तहत गैंगस्टर एक्ट शुरू किया। योगी के वार से अपराधियों की कमर टूटने लगी। एक-एक अपराधी जेल की सीखंचों में जाने लगा। जिनकी दहाड़ से लोग कांपते थे, वे जेल के अंदर रो रहे थे। जिनका कभी सूर्य अस्त नहीं होता था, अब उन्हें लगता है कि वे जेल में ही सड़ जायेंगे। आतंक की बदौलत माफियाओं ने अकूत संपत्ति बना ली थी। हड़प ली थी। अब समय था उन अपराधियों की संपत्ति को जब्त/ध्वस्त करने का। उत्तरप्रदेश की सड़कों पर बुलडोजर काफी संख्या में दिखाई पड़ने लगे। अपराधियों की सूची तैयार की गयी और योजनाबद्ध तरीके से कार्य को अंजाम दिया जाने लगा। योगी के दिमाग में एक और प्लान था, जो शायद अब धरातल पर उतर रहा है। माफियाअ‍ों की जब्त की हुई संपत्ति से गरीबों, दलितों, जरूरतमंदों का विकास करने का। योगी के एक्शन के साथ ही माफिया मुख्तार अंसारी गैंग के 244 सदस्यों पर आजमगढ़, मऊ, वाराणसी में कार्रवाई शुरू की गयी। इस कार्रवाई में मुख्तार अंसारी गैंग के 1 अरब, 94 करोड़ 82 लाख 67 हजार 859 रुपये की संपत्ति ध्वस्त/जब्त की गयी। करीब 158 अपराधी गिरफ्तार किये गये, 122 असलहों के लाइसेंस निरस्त किये गये, 110 अपराधियों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट, 30 के खिलाफ गुंडा एक्ट और 6 पर एनएसए के तहत कार्रवाई की गयी। मऊ, जहां मुख्तार का एक क्षत्र राज हुआ करता था, उस राज में घुस कर जो प्रहार योगी सरकार ने किया है, उस इलाके की धराशायी इमारतें उसके आतंक के अंत की ओर इशारा कर रही हैं। अभी हाल ही में मुख़्तार को पंजाब के रोपड़ जेल से उत्तरप्रदेश के बांदा जेल में लाया गया। यह पहला अवसर था, जब उत्तरप्रदेश जेल में आने से मुख्तार अंसारी कांप रहा था। रोपड़ जेल में उसे मेहमान का दर्जा मिला हुआ था और जेल के अंदर वह मंत्री की सुविधाओं का भोग कर रहा था।
    आतंक मिटाओ अभियान के तहत माफिया अतीक अहमद एवं उसके 89 गुर्गों पर प्रयागराज क्षेत्र में की गयी कार्रवाई में अब तक 3 अरब, 25 करोड़ 87 लाख की संपत्ति ध्वस्त/जब्त की गयी है। अतीक गैंग के 60 सदस्यों के असलहे निरस्त हुए, गैंग के खिलाफ 21 मुकदमे दर्ज कर नौ को जेल भेजा गया, 11 अपराधियों के खिलाफ गुंडा एक्ट और एक के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की गयी।

    माफिया सुंदर भाटी गैंग के नौ सदस्यों पर की गयी कार्रवाई में 63 करोड़, 24 लाख, 53 हजार की संपत्ति जब्त/ध्वस्त की गयी। इस गैंग के चार शस्त्र लाइसेंस निरस्त कर, तीन को जेल भेजा गया और दो लोगों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट की कार्रवाई की गयी। माफिया कुंटू सिंह गैंग के 43 सदस्यों के खिलाफ हुई कार्रवाई में 20 मुकदमे दर्ज कर 43 की गिरफ्तारी की गयी है। कुंटू सिंह गैंग के चार सदस्यों के खिलाफ गुंडा एक्ट, 24 के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की गयी। इस गैंग की 17 करोड़, 91 लाख, 96 हजार रुपये मूल्य की संपत्ति ध्वस्त/जब्त की गयी।

    जब्त की गयी जमीन और संपत्ति से गरीबों के लिए बनेंगे मकान
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एलान किया है कि प्रदेश में अलग-अलग माफियाओं से जो जमीन जब्त की गयी है, उस पर गरीबों, दलितों ओर जरूरतमंदों के लिए मकान बनाये जायेंगे। ये बातें योगी आदित्यनाथ ने विधानसभा में अनुपूरक बजट पेश करते वक़्त कही थीं। इसमें कुछ वक्त लगेगा। अब 2022 का विधानसभा चुनाव सामने है और उत्तरप्रदेश के माफियाओं के भाग्य का फैसला भी 2022 ही होना है। अगर योगी मजबूती से सत्ता में वापसी करते हैं, तब तो मिशन जीरो टॉलरेंस की नीति और सख्त होगी। अन्यथा पूर्व की सरकारों में माफियाओं की कहानी तो सभी को जुबानी याद है। यहां के कुख्यात माफियाओं का जाल उत्तरप्रदेश ही नहीं, पास के बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल के कमाऊ इलाकों तक में फैल गया था।

    अब तक गैंगस्टर एक्ट के तहत 1584 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध संपत्तियां जब्त
    उत्तरप्रदेश में 1 जनवरी 2020 से अप्रैल 2021 की अवधि के बीच गैंगस्टर एक्ट के तहत 5,558 केस दर्ज कर 22,259 अपराधियों की 11.28 अरब रुपये से अधिक की संपत्ति जब्त की गयी है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश के 25 चिह्नित कुख्यात माफियाओं और उनके सहयोगियों की लगभग 702 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियां अब तक जब्त की जा चुकी हैं। अन्य अपराधियों और उनकी संपत्ति जब्ती की सूची काफी लंबी है। पुलिस ने चिह्नित 25 कुख्यात माफियाओं, उनके परिजनों और सहयोगियों के 250 से अधिक शस्त्र लाइसेंस भी निरस्त किये हैं। योगी सरकार के चार साल से अधिक के कार्यकाल में गैंगस्टर एक्ट के तहत 1584 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध संपत्तियां जब्त/ध्वस्त की गयी हैं।

    यूपी में चल रहे काले कारोबार की सूची
    माफियाओं के खिलाफ चल रही कार्रवाई में अवैध बूचड़खाना, स्लाटर हाउस के ध्वस्तीकरण, पार्किंग ठेके की आड़ में अवैध वसूली पर लगाम, अवैध रूप से चल रहे मछली कारोबार पर रोक, सरकारी जमीनों को अवैध कब्जे से मुक्त कराने का सघन प्रयास, शूटरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करना, गलत ढंग से काम कर रहे ठेकेदारों के खिलाफ कार्रवाई, अवैध कोयला कारोबार में शामिल अपराधियों और उनकी संपत्ति की सूची काफी लंबी-चौड़ी है।

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