नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में नशीले पदार्थों की तस्करी और इनके इस्तेमाल का खतरा लगातार चिंता का विषय बनता जा रहा है। यह समस्या अब केवल कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा, सार्वजनिक स्वास्थ्य और संगठित अपराध से भी जुड़ती जा रही है। प्रवर्तन एजेंसियां अब सिर्फ नशीले पदार्थों की बरामदगी और तस्करों की गिरफ्तारी तक सीमित रहने के बजाय पूरे नारकोटिक्स नेटवर्क को खत्म करने की रणनीति पर काम कर रही हैं।
तीन साल में हजारों किलो ड्रग्स बरामद
जम्मू-कश्मीर में ड्रग्स की समस्या की गंभीरता का अंदाजा बरामदगी के आंकड़ों से लगाया जा सकता है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, विभिन्न एजेंसियों ने वर्ष 2023 में 11,066 किलोग्राम, 2024 में 5,708 किलोग्राम और 2025 में 4,491 किलोग्राम नशीले पदार्थ जब्त किए।
हालांकि, वर्ष 2023 के मुकाबले बाद के वर्षों में बरामदगी की मात्रा कम हुई है, लेकिन हर साल कई टन नशीले पदार्थों की बरामदगी यह बताती है कि तस्करी के नेटवर्क पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं। एक वरिष्ठ ड्रग कानून प्रवर्तन अधिकारी के अनुसार, जब्ती में कमी को सीधे तौर पर तस्करी में कमी का प्रमाण नहीं माना जा सकता।
अधिकारी के मुताबिक, बरामदगी की मात्रा खुफिया सूचनाओं के आधार पर चलाए गए अभियानों, आपूर्ति श्रृंखला के विभिन्न स्तरों पर कार्रवाई और एजेंसियों की खेप का पता लगाने की क्षमता पर निर्भर करती है।
तस्करों के साथ पूरे नेटवर्क पर कार्रवाई
जम्मू-कश्मीर की अंतरराष्ट्रीय सीमा से निकटता और तस्करी के लिए इस्तेमाल होने वाले संभावित मार्गों के कारण यह क्षेत्र विशेष रूप से संवेदनशील है। यही वजह है कि जांच एजेंसियों का ध्यान अब केवल ड्रग्स की खेप ले जाने या बेचने वाले लोगों तक सीमित नहीं है।
एजेंसियां सप्लायर, वित्तीय मदद पहुंचाने वाले लोगों, हैंडलर और नशीले पदार्थों की आवाजाही में सहयोग करने वाले अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही हैं। साथ ही ड्रग्स की तस्करी से जुड़े वित्तीय लेन-देन और आपराधिक नेटवर्क को भी कार्रवाई के दायरे में लाया जा रहा है।
शहरों से आगे गांवों और समुदायों तक पहुंची चिंता
नशे की समस्या अब केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रह गई है। जिलों और स्थानीय समुदायों में भी नशीले पदार्थों के इस्तेमाल और तस्करी को लेकर चिंता बढ़ रही है। ऐसे में प्रवर्तन कार्रवाई के साथ नशे की रोकथाम, प्रभावित लोगों के पुनर्वास और समय पर उपचार की जरूरत भी बढ़ गई है।
अधिकारियों का मानना है कि ड्रग्स के खिलाफ प्रभावी लड़ाई के लिए तस्करी रोकने के साथ-साथ नशे के इस्तेमाल की मांग को कम करना और युवाओं को इसके दुष्प्रभावों से बचाना भी जरूरी है।
लद्दाख में कम बरामदगी, लेकिन खतरा नजरअंदाज नहीं
लद्दाख में नशीले पदार्थों की बरामदगी जम्मू-कश्मीर की तुलना में काफी कम है, लेकिन अधिकारी इसे ड्रग्स के खतरे से पूरी तरह मुक्त क्षेत्र नहीं मानते। आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, वर्ष 2024 में लद्दाख में 15.886 किलोग्राम नशीले पदार्थ जब्त किए गए।
प्रशासन ने ड्रग्स का सेवन और बिक्री करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की है। युवाओं के नशे की चपेट में आने को लेकर भी चिंता जताई गई है। अधिकारियों के अनुसार, कम संख्या में मामले दर्ज होने या कम मात्रा में बरामदगी होने का अर्थ यह नहीं है कि क्षेत्र में नारकोटिक्स की समस्या नहीं है।
लद्दाख की भौगोलिक स्थिति, दूर-दराज के इलाके, बढ़ती कनेक्टिविटी और अंतरराष्ट्रीय सीमा से निकटता सुरक्षा एजेंसियों के लिए इसे संवेदनशील बनाती है। इसलिए यहां भी लगातार निगरानी और खुफिया तंत्र को मजबूत बनाए रखना जरूरी माना जा रहा है।
श्रीनगर में कई एजेंसियों की संयुक्त बैठक
इसी पृष्ठभूमि में पिछले सप्ताह श्रीनगर में जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के लिए दूसरी राज्य एवं केंद्र शासित प्रदेश स्तरीय संयुक्त समन्वय समिति की बैठक हुई। बैठक में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB), जम्मू-कश्मीर और लद्दाख पुलिस, एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF), प्रवर्तन निदेशालय (ED), सीमा सुरक्षा बल (BSF), इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB), कस्टम, राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI), आयकर विभाग और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) समेत कई एजेंसियों के प्रतिनिधि शामिल हुए।
बैठक में संयुक्त पूछताछ, खुफिया सूचनाओं के आदान-प्रदान, वित्तीय जांच, अवैध खेती और अंतरराज्यीय नेटवर्क की पहचान पर विशेष जोर दिया गया। इससे साफ है कि एजेंसियां अब ड्रग्स तस्करी को अलग-अलग मामलों के रूप में देखने के बजाय एक संगठित नेटवर्क अपराध के तौर पर देख रही हैं।
पूरी तस्करी श्रृंखला तोड़ने की तैयारी
बैठक से जुड़े एक अधिकारी के मुताबिक, ड्रग नियंत्रण को लेकर केंद्र के विजन डॉक्यूमेंट 2026-29 के लागू होने से इस रणनीति को और मजबूती मिलने की उम्मीद है। इसकी नेटवर्क-केंद्रित रणनीति का उद्देश्य नशीले पदार्थों की पूरी तस्करी श्रृंखला की पहचान कर उसके अलग-अलग हिस्सों पर एक साथ कार्रवाई करना है।
जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में ड्रग्स के खिलाफ अभियान अब केवल बरामदगी और गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रह गया है। सुरक्षा एजेंसियां तस्करी के नेटवर्क, वित्तीय स्रोत, अवैध खेती और स्थानीय स्तर पर नशे के प्रसार को एक साथ निशाना बनाने की तैयारी में हैं। वहीं, रोकथाम, उपचार और पुनर्वास को भी इस लड़ाई का अहम हिस्सा माना जा रहा है।



