केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण बुधवार को बेंगलुरु में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान भावुक हो गईं। कार्यक्रम महान कर्नाटक संगीत गायिका एमएस सुब्बुलक्ष्मी की 110वीं जयंती के मौके पर आयोजित किया गया था। इस दौरान जब उनकी प्रसिद्ध रचना बजाई गई तो निर्मला सीतारमण उसे सुनते हुए गुनगुनाने लगीं और उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े।

कार्यक्रम में वित्त मंत्री ने एमएस सुब्बुलक्ष्मी के संगीत, उनकी साधना और भारतीय शास्त्रीय संगीत में उनके योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि कर्नाटक संगीत में भक्ति उसकी जीवंत आत्मा है और एमएस सुब्बुलक्ष्मी ने अपनी गायकी के जरिए इस परंपरा को अलग-अलग भाषाओं और आध्यात्मिक परंपराओं तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

एमएस सुब्बुलक्ष्मी को याद कर भावुक हुईं निर्मला सीतारमण

कार्यक्रम के दौरान एमएस सुब्बुलक्ष्मी का गीत बजाया गया। इसे सुनते हुए निर्मला सीतारमण भावुक नजर आईं। सामने आए वीडियो में वह गीत के साथ गुनगुनाती दिखाई देती हैं। कुछ देर बाद उनकी आंखों में आंसू भी नजर आए।

वित्त मंत्री ने महान गायिका की कला और अनुशासन को याद करते हुए कहा कि उनकी सफलता सिर्फ उनकी आवाज की खूबसूरती तक सीमित नहीं थी। इसके पीछे वर्षों की साधना, प्रशिक्षण और कठोर अनुशासन था।

कौन थीं एमएस सुब्बुलक्ष्मी?

एमएस सुब्बुलक्ष्मी का पूरा नाम मदुरै षण्मुखवडिवु सुब्बुलक्ष्मी था। उनका जन्म 16 सितंबर 1916 को तमिलनाडु के मदुरै में हुआ था। संगीत से जुड़े परिवार में पली-बढ़ीं सुब्बुलक्ष्मी ने बचपन से ही कर्नाटक संगीत की शिक्षा हासिल करनी शुरू कर दी थी।

अपनी प्रतिभा और लंबे अभ्यास के दम पर उन्होंने कम उम्र में ही संगीत की दुनिया में पहचान बना ली। 20वीं सदी में कर्नाटक संगीत को देश और दुनिया के स्तर पर पहचान दिलाने वाली प्रमुख कलाकारों में उनका नाम लिया जाता है।

भक्ति और शास्त्रीय संगीत का अनोखा संगम

एमएस सुब्बुलक्ष्मी की गायकी की सबसे खास विशेषताओं में भक्ति भाव प्रमुख था। उन्होंने तमिल के अलावा संस्कृत और कई अन्य भारतीय भाषाओं में भी रचनाएं प्रस्तुत कीं।

उनकी आवाज में शास्त्रीय संगीत की गहराई और भक्ति का भाव एक साथ दिखाई देता था। यही वजह रही कि उनकी प्रस्तुतियां केवल संगीत प्रेमियों तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि आम लोगों के बीच भी बेहद लोकप्रिय हुईं।

भारत रत्न से हुईं सम्मानित

संगीत के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए एमएस सुब्बुलक्ष्मी को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया। उन्हें यह सम्मान 1998 में मिला।

उनकी उपलब्धियों में रेमन मैग्सेसे पुरस्कार भी शामिल है, जो उन्हें 1974 में मिला था। इसके अलावा 1966 में उन्होंने संयुक्त राष्ट्र महासभा में प्रस्तुति देकर भारतीय शास्त्रीय संगीत को अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहुंचाया।

संयुक्त राष्ट्र ने भी जारी किया था डाक टिकट

एमएस सुब्बुलक्ष्मी की विरासत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सम्मान मिला। उनके सम्मान में 2016 में संयुक्त राष्ट्र ने डाक टिकट जारी किया। उनकी रिकॉर्डिंग और भक्ति संगीत आज भी भारत सहित दुनिया के कई हिस्सों में सुने जाते हैं।

88 साल की उम्र में हुआ निधन

एमएस सुब्बुलक्ष्मी का निधन 11 दिसंबर 2004 को चेन्नई में हुआ था। उस समय वह 88 वर्ष की थीं। उनके निधन के वर्षों बाद भी उनकी आवाज और संगीत भारतीय सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा बने हुए हैं।

उनके जीवन और संगीत यात्रा को बड़े पर्दे पर पेश करने की भी तैयारी की जा रही है। प्रस्तावित पैन-इंडियन बायोपिक ‘MS: A Legacy on Screen’ में अभिनेत्री रश्मिका मंदाना के एमएस सुब्बुलक्ष्मी की भूमिका निभाने की बात कही गई है, जबकि फिल्म के संगीत की जिम्मेदारी अनिरुद्ध रविचंदर के पास बताई गई है।

Share.

Comments are closed.

Exit mobile version