रांची। 14वीं जेपीएससी (JPSC) सिविल सेवा पीटी परीक्षा के रिजल्ट को लेकर झारखंड में सियासी पारा चढ़ गया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने आयोग और राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने सिलसिलेवार ढंग से सरकार को आड़े हाथों लेते हुए जेपीएससी का नया नामकरण कर दिया। उन्होंने कहा कि मौजूदा हालातों को देखते हुए जेपीएससी का मतलब अब “झारखंड परीक्षा संकट आयोग” हो गया है।

शाहदेव ने आरोप लगाया कि इस रिजल्ट में भारी विसंगतियां हैं, जो छात्रों के भविष्य के साथ सीधे तौर पर खिलवाड़ है। भाजपा ने मांग की है कि इस विवादित पीटी परीक्षा के परिणाम को तुरंत रद्द किया जाए और पूरे मामले की सीबीआई (CBI) जांच कराई जाए।

OMR शीट में बड़ी धांधली का दावा: आयोग के 3 सदस्यों ने हस्ताक्षर करने से किया इनकार!

भाजपा प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने प्रेस वार्ता के दौरान चौंकाने वाले दावे किए। उन्होंने कहा कि यह महज कोई तकनीकी गलती नहीं, बल्कि एक सोची-समझी ‘आपराधिक साजिश’ है।

मुख्य आरोप और विसंगतियां:

  • सदस्यों का विरोध: शाहदेव के मुताबिक, आयोग के नियमों को ताक पर रखकर रिजल्ट जारी किया गया है। आयोग के 3 सदस्यों ने इस परिणाम पर हस्ताक्षर करने से साफ इनकार कर दिया था। बिना बहुमत और हस्ताक्षर के यह रिजल्ट पूरी तरह अवैध है।

  • रोल नंबर गायब: परिणाम की क्रमांक सूची से अचानक 832 अभ्यर्थियों के नाम गायब हो गए हैं, जो एक बड़े घोटाले की ओर इशारा करता है।

  • कम समय का दबाव: हाईकोर्ट की आड़ लेकर गलत रिजल्ट जारी करना अदालत की अवमानना है। मुख्य परीक्षा (Mains) की तैयारी के लिए छात्रों को केवल 16 दिनों का समय दिया गया है, जबकि नियमतः पीटी के बाद कम से कम 2 महीने का वक्त मिलना चाहिए।

भाजपा ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार ने तुरंत परीक्षा रद्द कर दोषियों पर एफआईआर (FIR) दर्ज नहीं की, तो इसके खिलाफ राज्यव्यापी उग्र आंदोलन किया जाएगा।

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