वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस और ईरान पर प्रतिबंधों को बढ़ाने वाले H.R. 5334, यानी ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026’ पर हस्ताक्षर कर इसे कानून बना दिया है। व्हाइट हाउस के मुताबिक, यह कानून रूस पर वैधानिक प्रतिबंधों, टैरिफ और अन्य पाबंदियों का दायरा बढ़ाता है, जबकि ईरान पर लागू मौजूदा प्रतिबंधों को भी आगे बढ़ाता है।
क्या है इस कानून का मकसद?
इस कानून का मुख्य फोकस रूस के नेतृत्व, ऊर्जा क्षेत्र, रक्षा उद्योग और उसके कथित ‘शैडो फ्लीट’ से जुड़े लोगों और संस्थाओं पर कार्रवाई बढ़ाना है। कानून में रूस से तेल और गैस खरीदने वाले कुछ देशों के खिलाफ अमेरिकी राष्ट्रपति को अतिरिक्त टैरिफ लगाने का अधिकार भी दिया गया है।
रिपोर्टों के अनुसार, इस प्रावधान के तहत ऐसे देशों के सामान पर 100 प्रतिशत तक अतिरिक्त शुल्क लगाया जा सकता है। भारत और चीन जैसे रूस के बड़े ऊर्जा खरीदार भी इस प्रावधान के दायरे में आ सकते हैं।
राष्ट्रपति के पास टैरिफ तय करने का अधिकार
कानून राष्ट्रपति को यह तय करने का व्यापक अधिकार देता है कि किन देशों पर टैरिफ लगाया जाए, उसकी दर कितनी हो और कुछ परिस्थितियों में प्रतिबंधों से छूट दी जाए या नहीं।
कानून के तहत रूस से तेल और प्राकृतिक गैस के बड़े खरीदार देशों पर कार्रवाई का प्रावधान रखा गया है। हालांकि, कुछ परिस्थितियों में गैस से जुड़े शुल्क से छूट का प्रावधान भी मौजूद है, खासकर तब जब संबंधित देश ने रूस से गैस आयात कम करने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए हों।
‘शैडो फ्लीट’ भी निशाने पर
नए कानून में रूस के ‘शैडो फ्लीट’ से जुड़े नेटवर्क पर भी कार्रवाई का प्रावधान है। इसमें ऐसे जहाजों के मालिक, ऑपरेटर, मैनेजर, बीमा कंपनियां और अन्य पक्ष शामिल हो सकते हैं, जिन पर रूसी ऊर्जा कारोबार को मदद देने या प्रतिबंधों से बचने में भूमिका निभाने का आरोप हो।
इसका उद्देश्य रूस के ऊर्जा निर्यात और उससे जुड़े अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क पर आर्थिक दबाव बढ़ाना है।
ईरान पर भी बढ़ाया गया प्रतिबंध
कानून सिर्फ रूस तक सीमित नहीं है। इसमें ईरान पर पहले से लागू प्रतिबंधों को भी आगे बढ़ाने का प्रावधान शामिल है। इस तरह नया कानून रूस और ईरान दोनों के खिलाफ अमेरिकी प्रतिबंध व्यवस्था को मजबूत करता है।
30 दिनों के भीतर लागू होने का प्रावधान
कानून के प्रावधानों के अनुसार, इसके हस्ताक्षर के 30 दिनों के भीतर संबंधित व्यवस्था लागू की जानी है। इसके बाद अमेरिकी प्रशासन रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों के खिलाफ कानून में दिए गए अधिकारों के तहत टैरिफ और अन्य प्रतिबंधात्मक कदमों पर निर्णय ले सकता है।



