रांची। स्वास्थ्य व्यवस्था को अंतिम पायदान तक पहुंचाने वाली 42 हजार स्वास्थ्य सहियाएं स्थायीकरण और मानदेय में बढ़ोतरी सहित छह सूत्री मांगों को लेकर हड़ताल पर हैं। सहियाओं की मांग 18 हजार रुपये मानदेय करने की है। गौरतलब है कि झारखंड में पहले से ही 4 हजार से ज्यादा पारा मेडिकलकर्मी हड़ताल पर हैं। पारा मेडिकलकर्मी नियमित किये जाने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। 10 साल पहले इनकी नियुक्ति राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत हुई थी। ये अपनी मांगों के समर्थन में सुप्रीम कोर्ट का हवाला दे रहे हैं। पारा मेडिकल कर्मियों के बाद अब 42 हजार सहियाओं के हड़ताल पर भाजपा विधायक दल के नेता बाबूलाल मरांडी ने सवाल उठाये हैं। बाबूलाल मरांडी ने कहा कि झारखंड में पारा चिकित्साकर्मियों के बाद अब 42 हजार सहिया अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चली गयी हैं। राज्य के गांवों से लेकर शहर की स्वास्थ्य सुविधाएं चरमरा गयी हैं। लेकिन राजनीतिक यात्राओं में अपनी झूठी उपलब्धियों का बखान करने वाले सीएम साहब को न इन कर्मियों का दर्द दिखता है ना ही खबर।

पिछले साल मोरहाबादी मैदान में तीन माह दिया धरना था
सहिया संघ की प्रदेश अध्यक्ष माया सिंह ने बताया कि वे पिछली बार दिसंबर महीने में तीन दिनों तक मोरहाबादी में धरना पर थीं। जहां स्वास्थ्य मंत्री ने आश्वासन देकर धरना समाप्त कराया था। पर उस पर कोई अमल नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि हम धरने पर तो हैं, पर प्रसव के लिए महिलाओं को दिक्कत नहीं होने दे रहे हैं। गर्भवती महिलाओं और नवजात बच्चों को दी जाने वाली सुविधा के लिए ‘गाइड किया जा रहा है। सभी प्रखंड मुख्यालयों में सहियाएं धरना पर हैं। उन्होंने कहा कि जबतक संतोषजनक कार्यवाही नहीं होगी, तब तक वे अनिश्चितकालीन हड़ताल पर रहेंगी। झारखंड के अनुबंध पारा चिकित्सा कर्मी आठ दिनों से हड़ताल पर हैं। आठवें दिन से वे स्थायीकरण की मांग को लेकर राजभवन के पास आमरण अनशन पर हैं।

पारा मेडिकर्मियों की नियमित करने की मांग

झारखंड राज्य एनआरएचएम एएनएम-जीएनएम अनुबंध कर्मचारी संघ की प्रदेश महासचिव और अनशन पर बैठी वीणा सिंह ने कहा कि बीते 16 वर्षों से अनुबंध पर काम कर रहे हैं। लेकिन बढ़ती महंगाई में सरकार अल्प मानदेय में काम करवा रही है। अपने जीवन का स्वर्णिम समय स्वास्थ्य विभाग और राज्य के लोगों की सेवा करते हुए बिता दिया। लेकिन अब तक हम लोगों को स्थाई नहीं किया गया है। चरणबद्ध आंदोलन के दौरान स्वास्थ्य कर्मियों ने हवन, रक्तदान, मानव शृंखला और कैंडल मार्च भी निकाला। लेकिन जब राज्य सरकार की नींद नहीं खुली, तब जाकर मंगलवार से राज्य भर के 21 कर्मचारी आमरण अनशन पर बैठ गये हैं। आमरण अनशन पर बैठे कर्मचारियों की हौसला अफजाई और संघ की एकजुटता के लिए सदस्यों ने अनशनकारियों को माला पहनाया।

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