ढाका: बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन के बाद पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के खिलाफ कानूनी शिकंजा लगातार कसता जा रहा है। गुरुवार को बांग्लादेश के अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (ICT) में बहुचर्चित ‘जहाजबाड़ी हत्याकांड’ के मामले में औपचारिक आरोप पत्र (चार्जशीट) दाखिल किया गया। इस आरोप पत्र में शेख हसीना के अलावा तत्कालीन सरकार के कई रसूखदार मंत्रियों और शीर्ष पुलिस अधिकारियों को नामजद किया गया है।
क्या है जहाजबाड़ी हत्याकांड? अभियोजन पक्ष द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, यह मामला 26 जुलाई 2016 का है। उस समय ढाका के कल्याणपुर इलाके में स्थित ‘जहाजबाड़ी’ नामक एक इमारत पर पुलिस और रैपिड एक्शन बटालियन (RAB) ने संयुक्त छापेमारी की थी। इस ऑपरेशन के दौरान पुलिस ने दावा किया था कि उन्होंने नौ खतरनाक आतंकवादियों को मार गिराया है। हालांकि, अब दाखिल किए गए आरोप पत्र में सनसनीखेज दावा किया गया है कि यह एक ‘फर्जी एनकाउंटर’ था।
आरोप पत्र के मुख्य बिंदु:
फर्जी एनकाउंटर का दावा: आरोप है कि मारे गए नौ लोगों का आतंकवाद से कोई लेना-देना नहीं था।
हिरासत में हत्या: चार्जशीट के मुताबिक, इन लोगों को पहले ही हिरासत में ले लिया गया था और बाद में करीब से गोली मारकर उनकी हत्या कर दी गई।
साजिश का आरोप: तत्कालीन पुलिस महानिरीक्षक एकेएम शाहिदुल हक ने उस समय दावा किया था कि ये सभी प्रतिबंधित संगठन ‘नियो-जेएमबी’ के सदस्य थे, जिसे अब एक सोची-समझी साजिश बताया जा रहा है।
हसीना के साथ ये दिग्गज भी फंसे आईसीटी के अभियोजक गाजी एमएच तमीम ने बताया कि इस केस में शेख हसीना के साथ पूर्व गृहमंत्री असदुज्जमां खान कमाल, पूर्व आईजीपी शाहिदुल हक, पूर्व पुलिस कमिश्नर असदुज्जमां मियां और स्पेशल ब्रांच के पूर्व प्रमुख मोनिरुल इस्लाम को भी मुख्य आरोपी बनाया गया है।
न्यायाधिकरण अब इस आरोप पत्र के आधार पर मामले की अगली सुनवाई करेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ये आरोप सिद्ध होते हैं, तो शेख हसीना और उनके करीबियों को अंतरराष्ट्रीय कानूनों के तहत कड़ी सजा का सामना करना पड़ सकता है।

