नई दिल्ली। कोरिया गणराज्य के 108 बौद्ध 43 दिनों की तीर्थ यात्रा पर 1100 किलोमीटर से अधिक की पैदल यात्रा करेंगे। सांगवोल सोसाइटी द्वारा आयोजित पैदल यात्रा की शुरुआत 09 फरवरी से होगी और 23 मार्च को खत्म होगी।
सोमवार को आयोजित प्रेस वार्ता में सूचना और प्रसारण मंत्रालय के सचिव अपूर्व चंद्रा ने बताया कि भारत और दक्षिण कोरिया राजनयिक संबंधों की स्थापना के 50 साल पूरे होने का जश्न मना रहे हैं, ऐसे में इस तीर्थयात्रा का महत्व और भी बढ़ जाता है। इस यात्रा का उद्देश्य दोनों देशों के बीच मित्रता और सहयोग को बढ़ाना है। पर्यटक भारत में उत्तर प्रदेश और बिहार में बौद्ध तीर्थ स्थलों का दौरा करेंगे और बाद में नेपाल जाएंगे।
सूचना एवं प्रसारण सचिव ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विजन भारत में बौद्ध पर्यटन सर्किट को दुनिया में ले जाने का है। इस सर्किट का उद्देश्य पर्यटकों को भगवान बुद्ध की शिक्षाओं का अनुभव करने में मदद करना है और बुद्ध के जीवनकाल से दर्शन कराना है। इस तीर्थयात्रा के दौरान कवर किए जाने वाले स्थलों में बुद्ध के जन्म से लेकर उनके परिनिर्वाण तक का जीवन शामिल है।
इस मौके पर भारत में कोरिया गणराज्य के राजदूत चांग जे-बोक ने कहा कि वर्ष 2023 देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों के लिए विशेष है क्योंकि दोनों देश राजनयिक संबंधों के 50 वर्षों के इस ऐतिहासिक मील के पत्थर का जश्न मना रहे हैं। उन्होंने कहा कि हर साल हजारों पर्यटक कोरिया से भारत आते हैं। यह पैदल यात्रा वाराणसी के सारनाथ से शुरू होगी और नेपाल होते हुए श्रावस्ती में समाप्त होगी।
इस आयोजन के महत्व के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि मेगा बौद्ध तीर्थयात्रा हमारी साझा बौद्ध विरासत को दर्शाता है। यह लोगों के बीच संपर्क को और गहरा करने में काफी मददगार साबित होगा। इस यात्रा के दौरान तीर्थ यात्री आठ बौद्ध स्थलों पर अपनी श्रद्धांजलि देंगे।