नई दिल्ली। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) ने शनिवार रात जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) परिसर के कोयना मेस में “सन्नाटे का शोर: पश्चिम बंगाल में महिलाओं के खिलाफ राजनीतिक हिंसा की वास्तविकता” विषय पर मेस टॉक का आयोजन किया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य पश्चिम बंगाल में महिलाओं के खिलाफ बढ़ती राजनीतिक हिंसा की समस्या पर छात्र समुदाय का ध्यान आकर्षित कराना और इस मुद्दे पर सार्वजनिक चर्चा को बढ़ावा देते हुए प्रताड़ित महिलाओं के लिए न्याय सुनिश्चित कराना था।

कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में सांसद डॉ. सुकांता मजूमदार और पश्चिम बंगाल भाजपा के अध्यक्ष सुवेंदु अधिकारी ने चर्चा में हिस्सा लिया और खुल कर जेएनयू के छात्रों से बात की। सुकांता मजूमदार ने कहा, बंगाल का संदेशखाली नर्क से कम नहीं है जहां अत्यंत बर्बर अत्याचार महिलाओं को सहना पड़ रहा है। अपनी बात कहते हुए एक वयोवृद्ध महिला ने बताया कि उसने अपनी बहु को मध्यप्रदेश काम करने के लिए भेज दिया है। कारण पूछने पर उसने बताया की इसकी बहू सुंदर है, यदि संदेशखाली में रखते तो टीएमसी के लोग इससे उठा ले जाते।

इतनी बर्बर एवं दुरूह परिस्थिति में रहने के बावजूद साहस करते हुए वहां की महिलाएं जिस तरह आकर अपनी पीड़ा मीडिया को बता रही हैं, वह उनकी पीड़ा की पराकाष्ठा को बता रहा। उन्होंने कहा संदेशखाली में महिलाओं पर हो रहे अत्याचार के आरोपित शाहजहां शेख पर तत्काल कार्रवाई हो और हमें विश्वास है की हमारी पीड़ित बहनों को न्याय दिलाने के लिए जेएनयू के युवा आवाज उठाएंगे।

सुवेंदु अधिकारी ने कहा, “पश्चिम बंगाल को तृणमूल कांग्रेस और वामपंथी गुंडों ने जकड़ लिया है। ममता सरकार में रोज लोकतंत्र की हत्या हो रही है और देशभर के सेक्युलर इस विषय में चुप्पी साधे हुए हैं लेकिन समय आने पर जनता इसका न्याय करेगी। संदेशखाली की मन विचलित करने वाली घटना केवल एक घटना नहीं है पूरे बंगाल में टीएमसी के गुंडों का अत्याचार जारी है।

उल्लेखनीय है कि संदेशखाली उत्तर 24 परगना जिले का एक गांव है, जहां फरवरी में महिलाओं ने धमकियों और प्रताड़ना के बावजूद अपने यौन उत्पीड़न की बात मीडिया के सामने रखीं। कुछ महिलाओं को उनके गांव में कुछ लोगों द्वारा यौन उत्पीड़न का शिकार बनाया जाता था। आरोपितों में तृणमूल कांग्रेस नेता शाहजहां शेख, शिबू हाजरा और उत्तम सरदार प्रमुख हैं।

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