मनिका विधायक रामचन्द्र सिंह ने सत्र में उठाया मुद्दा, NCC कंपनी की जांच, कार्रवाई व ब्लैकलिस्ट करने की मांग….
बरवाडीह। सड़क किनारे बिजली के पोल गाड़े जाने को लेकर क्षेत्र में चल रहा विवाद का खबर प्रमुखता से आज़ाद सिपाही अखबार में सोमवार को छपी थी।जिसके बाद गुरुवार को अब राज्य विधानसभा तक पहुंच गया है। मनिका विधानसभा क्षेत्र के विधायक रामचन्द्र सिंह ने विधानसभा सत्र के दौरान इस मामले को प्रमुखता से उठाते हुए एनसीसी (NCC) कंपनी की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने सरकार से पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने, दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करने तथा कंपनी को ब्लैकलिस्ट करने की मांग की।विधायक ने सदन में कहा कि बिजली पोल लगाने के कार्य में निर्धारित मानकों की अनदेखी की जा रही है। कई स्थानों पर पोल को ट्रैक्टर के माध्यम से सड़क पर घसीटते हुए लाया जा रहा है, जिससे नई एवं पुरानी सड़कों को भारी नुकसान पहुंच रहा है।
सड़क की सतह पर दरारें पड़ रही हैं और गिट्टी उखड़ रही है, जिससे आमजन को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।उन्होंने यह भी कहा कि सड़क के बिल्कुल किनारे पोल गाड़ दिए जाने से मुख्य बाजार समेत कई सड़कें संकीर्ण हो गई हैं। इससे बड़े वाहनों के आवागमन में कठिनाई हो रही है और दुर्घटना की आशंका बढ़ गई है। ग्रामीण क्षेत्रों में जहां पहले ही सड़कें संकरी हैं, वहां इस प्रकार की लापरवाही से हालात और गंभीर हो गए हैं।विधायक रामचन्द्र सिंह ने विशेष रूप से बरवाडीह बाजार, आदर्शनगर, लात,गारू, मनिका, महुआडांड़ सहित अन्य क्षेत्रों का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां भी पोल गाड़ने में तकनीकी मानकों का पालन नहीं किया गया है। कई जगहों पर स्थानीय ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों की आपत्तियों को नजरअंदाज किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि बिना समुचित सर्वे और सुरक्षा मानकों के कार्य कराया जा रहा है।साथ ही उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कई स्थानों पर रात के अंधेरे में चोरों की तरह पोल गाड़ दिए जा रहे हैं, ताकि स्थानीय लोगों के विरोध और सवालों से बचा जा सके।
विधायक ने कहा कि यदि कार्य पूरी तरह पारदर्शी और नियमानुसार हो रहा है तो फिर इसे रात में जल्दबाजी में करने की आवश्यकता क्यों पड़ रही है। इस प्रकार की कार्यशैली संदेह पैदा करती है और प्रशासन की निगरानी पर भी सवाल खड़े करती है।सदन में उन्होंने सरकार से मांग की कि जिन सड़कों को पोल लाने और गाड़ने की प्रक्रिया में नुकसान पहुंचा है, उनकी तकनीकी जांच कराई जाए और मरम्मत का पूरा खर्च संबंधित कंपनी से वसूला जाए। साथ ही भविष्य में कार्य प्रारंभ करने से पहले स्थानीय प्रशासन एवं जनप्रतिनिधियों से समन्वय सुनिश्चित किया जाए, ताकि जनता की सहमति और सुरक्षा दोनों बनी रहे।विधायक ने स्पष्ट किया कि वे विकास कार्यों के विरोधी नहीं हैं, लेकिन विकास के नाम पर जनता की सुरक्षा, सड़क की गुणवत्ता और नियमों से समझौता किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जा सकता।
मामले के विधानसभा में उठने के बाद प्रशासनिक महकमे में हलचल तेज हो गई है। अब देखना यह है कि सरकार और संबंधित विभाग इस पर क्या ठोस कार्रवाई करते हैं। क्षेत्रवासियों को उम्मीद है कि जांच के बाद दोषियों पर सख्त कदम उठाए जाएंगे और भविष्य में इस प्रकार की लापरवाही पर पूरी तरह रोक लगेगी।
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