नयी दिल्ली। झारखंड में जनसेवा के लिए भाजपा सांसद कड़िया मुंडा को पद्म भूषण, स्वास्थ्य के क्षेत्र में नि:स्वार्थ सेवा करने के लिए रांची के चिकित्सक डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी, पर्यावरण के क्षेत्र में काम करने के लिए जमुना टुडू (लेडी टार्जन) और सांस्कृतिक क्षेत्र में सराहनीय काम के लिए हजारीबाग के बुलू इमाम को पद्मश्री दिया गया है। भारत के राष्टपति रामनाथ कोविंद ने सोमवार को राष्टÑपति भवन में इन शख्सियतों को यह सम्मान देकर सम्मानित किया।

सादगी कड़िया मुंडा की पहचान है : बीजेपी के दिग्गज नेता कड़िया मुंडा जमीन से जुड़े नेता रहे हैं। इनकी सादगी और ईमानदारी ना केवल खूंटी, बल्कि पूरे झारखंड में मानी जाती है। कड़िया मुंडा खूंटी से आठ बार जीत चुके हैं। 1977 में पहली बार उन्होंने बीएलडी टिकट पर चुनाव जीता था। इसके बाद 1989 से 1999 तक लगातार सांसद रहे। 2004 में कांग्रेस के हाथों हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद से लगातार कड़िया मुंडा ने बीजेपी को जीत दिलायी है।

मरीजों के लिए भगवान हैं डॉ मुखर्जी : मरीजों के लिए भगवान का रूप हैं डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी। वह 1957 से अपने लालपुर की पैथ लैब में बैठ रहे हैं। यहां से होने वाली कमाई के जरिये ही वह मरीजों को पांच रुपये में दवाएं देते हैं। मुखर्जी अब गरीबों के डॉक्टर के नाम से जाने जाने लगे हैं। वह कहते हैं कि मैंने यह सेवा किसी अवार्ड के लिए नहीं की, मगर मेरे योगदान को देखते हुए अवार्ड के लिए चुना जाना गर्व का विषय है। उन्होंने कहा कि यह मेरे और मेरे मरीजों के लिए सम्मान का विषय है। मैंने मरीजों का इलाज करना तब से शुरू किया था, जब मैंने अपनी पढ़ाई पूरी की थी। कौन बनेगा करोड़पति में उन पर डॉक्यूमेंट्री भी दिखायी जा चुकी है।

लेडी टार्जन हैं जमुना टुडू : सिंहभूम जिले की 38 साल की जमुना टूडू लेडी टार्जन के नाम से जानी जाती हैं। रोज सुबह वह अपनी चार-छह साथियों के साथ जंगल बचाने निकल जाती हैं। हाथ में पानी की बोतल और टांगी होती है। किसी ने पर्यावरण को नुकसान पहुंचाया, तो उसकी खैर नहीं। 2004 में वन रक्षक समिति बनायी, जिससे गांव की 60 महिलाएं जुड़ीं। अब 300 महिलाओं का ग्रुप है।

कद्दावर पर्यावरणविद हैं बुलू इमाम: हजारीबाग के दीपूगड़ा में रहने वाले बुलू इमाम को पद्मश्री से अलंकृत किया गया। 1942 में जन्मे बुलू इमाम की पहचान सांस्कृतिक एवं कला क्षेत्र में रही है। आज भी जनजाति कला एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के प्रति समर्पित एक कद्दावर पर्यावरणविद हैं। बुलू इमाम को पहले भी गांधी फाउंडेशन लंदन द्वारा अंतरराष्ट्रीय शांति के लिए पुरस्कृत किया जा चुका है।

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