आजाद सिपाही संवाददाता
रांची। राज्यसभा सांसद सह भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने झामुमो-कांग्रेस की गठबंधन वाली सरकार पर बड़ा प्रहार किया है। उन्होंने न सिर्फ वर्तमान की हेमंत सरकार, बल्कि सोरेन परिवार के पिछले कार्यकाल पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि प्रदेश में शिबू सोरेन तीन बार मुख्यमंत्री रहे, वहीं लगभग पांच साल हेमंत सोरेन खुद मुख्यमंत्री पद पर रहे और अभी भी हैं। हेमंत सोरेन उपमुख्यमंत्री भी रहे, और कांग्रेस यूपीए की सरकार ने पूर्व में जानबूझ कर झारखंड में तीन बार राष्ट्रपति शासन लगा कर परोक्ष रूप से करीब दो साल झारखंड में राज किया। राज्य में सत्ता में रह कर जेएमएम-कांग्रेस-राजद के गठबंधन वाली सरकार ने सिर्फ राज्य को लूटने का ही काम किया है। उन्होंने झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन को भी घेरते हुए कहा कि 2006 में यूपीए की मनमोहन सरकार में शिबू सोरेन के पास कोयला मंत्रालय था। उनके मंत्री रहने के दौरान ऐसा लग रहा था कि कोयला मंत्रालय को माफिया चला रहे हैं। फिर उसी कोयला घोटाले की जांच के सिलसिले में सीबीआइ उनसे लंबी पूछताछ कर चुकी है। कहा कि झामुमो-यूपीए गठबंधन की सरकार में लूट और भ्रष्टाचार में पूरी दाल ही काली प्रतीत होती है। प्रवर्तन निदेशालय (इडी) ने न सिर्फ मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, बल्कि उनके चहेते सुरक्षा प्रभारी डीएसपी विमल कुमार, विशेष प्रतिनिधि पंकज मिश्रा, उद्योग सचिव के साथ राज्य खनन और भूविज्ञान विभाग के सचिव आइएएस अधिकारी पूजा सिंघल, दलाल विशाल चौधरी तथा प्रधान सचिव रहे आइएएस अरुण कुमार एक्का पर भी इडी चार्जशीट दर्ज कर पूछताछ कर चुकी है। इससे प्रदेश की जनता समझ चुकी है कि यहां बैठी सरकार कितनी भ्रष्ट है। वर्तमान में झारखंड में बेरोजगारी की समस्या पर लगातार आंदोलन और सियासत हो रही है। वहीं सरकार है कि अपनी युवाविरोधी नीतियों से बाज नहीं आ रही। वर्तमान की गठबंधन सरकार की सत्ता को तीन साल पूरे हो गये हैं। झामुमो, कांग्रेस और राजद के ठगबंधन वाली सरकार से इन वादों के पूरा होने की उम्मीद में युवा तीन साल से इंतजार करते करते थक हार गय, पर अब तक प्रदेश की युवाविरोधी सरकार ने युवाओं की नहीं सुनी। उनके किये गये वादे को पूरा करने की मांग अब प्रदेश के युवा भी लगातार कर रहे हैं। लेकिन हेमंत सोरेन ने मुख्यमंत्री के रूप में पांच वर्ष शासन कर के सिर्फ जनता से झूठ बोलने का काम किया है। हमने ये भी देखा है कि हेमंत सरकार न तो खुद प्रदेश की जनता के लिए कोई अच्छी कल्याणकारी स्कीम बना रही, न ही केंद्र सरकार की गरीब किसानों के कल्याणकारी योजनाओं को सुचारु रूप से चलने में कोई योगदान दे रही है। वाकई दुर्भाग्यपूर्ण है कि प्रदेश में एक जनविरोधी, विकासविरोधी सरकार कुंडली मार के बैठी है। वो दिन दूर नहीं जब इस प्रदेश की जनता प्रदेश के इस ठगबंधन सरकार को उखाड़ फेंकेगी।