विशेष
नीतीश और चंद्रबाबू नायडू की पार्टियों पर हैं सभी की निगाहें
संसद के दोनों सदनों में तैयार हो चुकी है टकराव की जमीन

नमस्कार। आजाद सिपाही विशेष में आपका स्वागत है। मैं हूं राकेश सिंह।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्ववाली एनडीए सरकार अपने तीसरे कार्यकाल में एक बेहद महत्वपूर्ण विधेयक पेश करने जा रही है, जिसका दूरगामी असर होगा और आजादी के बाद से देश में चल रही एक बेहद अलोकतांत्रिक परंपरा को खत्म करने का मार्ग प्रशस्त होगा। यह विधेयक है वक्फ संशोधन विधेयक। इस विधेयक को लेकर देश का सियासी माहौल पहले से ही गर्म है। सत्ताधारी एनडीए के सबसे बड़े घटक दल भाजपा का इस मुद्दे पर नजरिया पूरी तरह साफ है, लेकिन उसके बाकी सहयोगी दलों को लेकर संशय की स्थिति बरकरार है। एनडीए सरकार के दो प्रमुख सहयोगी, नीतीश कुमार और एन चंद्रबाबू नायडू ने वक्फ विधेयक पर अपना नजरिया अब तक स्पष्ट नहीं किया है। चिराग पासवान के नेतृत्व वाली लोजपा (आर) ने भी वक्फ बिल को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट नहीं की है। ऐसे में कहा जा सकता है कि यह विधेयक वास्तव में संसद में एनडीए की अग्निपरीक्षा लेगा। इस विधेयक पर विपक्ष के साथ टकराव की जमीन पहले से ही तैयार हो चुकी है और मुस्लिम तुष्टिकरण की पक्षधर कांग्रेस और उसकी सहयोगी पार्टियों ने इसका विरोध करने का एलान किया है। ऐसे में यह देखनेवाली बात होगी की एनडीए के नेता संसद में इस विधेयक को पारित कराने को लेकर क्या रणनीति अपनाते हैं। वक्फ विधेयक दो अप्रैल को संसद में पेश होना है और भाजपा ने अपने सभी सांसदों को सदन में मौजूद रहने के लिए ह्विप जारी कर दिया है, लेकिन एनडीए के बाकी दल अब तक चुप हैं। ऐसे में क्या होगा भाजपा का रवैया और क्या होगा वक्फ विधेयक का, बता रहे हैं आजाद सिपाही के विशेष संवाददाता राकेश सिंह।

संसद के चालू बजट सत्र के दूसरे चरण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार वक्फ संशोधन बिल लाने की तैयारी में है। यह बिल दो अप्रैल को लोकसभा में पेश किया जायेगा। संसदीय कार्य एवं अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री किरेन रिजिजू ने पिछले साल आठ अगस्त को इस बिल को लोकसभा में पेश किया था, जिसे विपक्ष के हंगामे के बाद संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) को भेज दिया गया था। जगदंबिका पाल की अगुवाई वाली जेपीसी की रिपोर्ट के बाद इससे संबंधित संशोधित बिल को कैबिनेट ने पहले ही मंजूरी दे दी है। सरकार यह बिल संसद में लाती है, तो इसे पारित कराना कम चुनौतीपूर्ण नहीं रहने वाला। यह बिल पहले ही जेपीसी से होकर आ रहा है।

क्या है संसद में संख्या बल
लोकसभा में अभी 542 सदस्य हैं और 240 सदस्यों के साथ भाजपा सबसे बड़ी पार्टी है। भाजपा की अगुवाई वाले सत्ताधारी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के सदस्यों की संख्या 293 है, जो बिल पारित कराने के लिए जरूरी 272 के जादुई नंबर से अधिक है। विपक्ष की बात करें, तो कांग्रेस के 99 सदस्य हैं और इंडिया ब्लॉक में शामिल सभी दलों को मिला लें, तो भी संख्याबल 233 ही पहुंचता है। आजाद समाज पार्टी के एडवोकेट चंद्रशेखर, शिरोमणि अकाली दल की हरसिमरत कौर बादल भी सांसद हैं, जिनकी पार्टियां एनडीए या इंडिया ब्लॉक, किसी भी गठबंधन में नहीं हैं। कुछ निर्दलीय सांसद भी हैं, जो किसी भी गठबंधन के साथ खुल कर नहीं हैं। ऊपरी सदन राज्यसभा की बात करें, तो वहां इस समय 236 सदस्य हैं। इसमें भाजपा का संख्याबल 98 है। गठबंधनों के लिहाज से देखें, तो एनडीए के सदस्यों की संख्या 115 के करीब है। छह मनोनीत सदस्यों को भी जोड़ लें, जो आम तौर पर सरकार के पक्ष में ही मतदान करते हैं, तो नंबर गेम में एनडीए 121 तक पहुंच जा रहा है, जो विधेयक पारित कराने के लिए जरूरी 119 से दो अधिक है। कांग्रेस के 27 और इंडिया ब्लॉक के अन्य घटक दलों के 58 सदस्य राज्यसभा में हैं। कुल मिलाकर विपक्ष के पास 85 सांसद हैं। वाइएसआर कांग्रेस के नौ, बीजेडी के सात और एआइएडीएमके के चार सदस्य राज्यसभा में हैं। छोटे दलों और निर्दलीय मिलाकर तीन सदस्य हैं, जो न तो सत्ताधारी गठबंधन में हैं और ना ही विपक्षी गठबंधन में।

बिल पर सरकार बनाम विपक्ष क्यों
सत्तापक्ष का कहना है कि वक्फ संशोधन बिल के माध्यम से इसकी संपत्तियों से संबंधित विवादों के निपटारे का अधिकार मिलेगा। वक्फ की संपत्ति का बेहतर इस्तेमाल हो सकेगा और इससे मुस्लिम समाज की महिलाओं को भी मदद मिल सकेगी। भाजपा सांसद जगदंबिका पाल की अगुवाई वाली जेपीसी ने एनडीए के घटक दलों की ओर से प्रस्तुत किये गये 14 संशोधनों के साथ अपनी रिपोर्ट संसद में पेश कर दी थी। जेपीसी ने विपक्ष की ओर से प्रस्तावित किये गये 44 संशोधनों को खारिज कर दिया था।

क्या है एनडीए के सहयोगी दलों का रुख
वक्फ संशोधन बिल पर एनडीए में भाजपा के सहयोगी दलों जदयू और चिराग पासवान की पार्टी लोजपा (आर) ने सस्पेंस बढ़ा दिया है। दोनों दलों ने बिल को लेकर अपने पत्ते नहीं खोले हैं, लेकिन इशारों में ही विपक्ष की टेंशन बढ़ा दी है। चिराग और नीतीश की पार्टी ने कहा कि विपक्ष मुसलमानों को भ्रमित कर रहा है। इस तरह लोगों को डराना नहीं चाहिए। हालांकि जदयू के एमएलसी गुलाम गौस ने खुलकर बिल का विरोध किया है और मोदी सरकार से इसे वापस लेने की अपील की है। गुलाम गौस ने कहा कि मेरी राय है कि इस विधेयक को तत्काल वापस लिया जाये। यह देश हित और जनहित में होगा। किसान आंदोलन जब चला, तो बहुत से लोग हताहत हुए और अंत में देश हित में विधेयक को वापस लिया गया। अब जब किसान विधेयक वापस हो सकता है, तो फिर वक्फ बिल क्यों नहीं होगा। वहीं ललन सिंह ने इस पर कुछ नहीं कहा। उन्होंने कहा कि हम लोकसभा में ही इस बिल पर अपना रुख स्पष्ट करेंगे। हमें विपक्ष से सर्टिफिकेट लेने की जरूरत नहीं है। नीतीश कुमार को कांग्रेस के प्रमाण पत्र की जरूरत नहीं है। वहीं संजय झा ने कहा कि वक्फ पर कानून बनाना है, तो उसे पीछे से लागू न किया जाये। नीतीश कुमार जी ने कभी भी मुसलमानों का अहित नहीं होने दिया है। चिराग पासवान की पार्टी ने भी बिल पर हां या ना नहीं कहा है, लेकिन उसने विपक्ष पर भ्रम फैलाने का आरोप लगाया है। वक्फ संशोधन बिल को लेकर अमित शाह एनडीए के सहयोगी और बिहार में सरकार के साझेदार जदयू को साधने में जुट गये। शाह ने ललन सिंह और संजय झा के साथ बैठक की। बैठक में शाह ने जदयू सांसदों के साथ वक्फ संशोधन बिल को लेकर चर्चा की। वहीं एनडीए की एक और अहम सहयोगी तेलुगू देशम पार्टी ने वक्फ संशोधन बिल का समर्थन करने का फैसला किया है। टीडीपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रेम कुमार जैन ने मंगलवार को कहा कि पार्टी वक्फ (संशोधन) विधेयक के समर्थन में है। उन्होंने आश्वासन दिया कि आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू मुसलमानों के पक्ष में हैं। बिल के बारे में बोलते हुए प्रेम कुमार जैन ने कहा कि पूरा मुस्लिम समुदाय वक्फ संशोधन विधेयक के पेश होने का इंतजार कर रहा है। हमारी पार्टी इसका समर्थन करेगी। चंद्रबाबू नायडू पहले ही कह चुके हैं कि हम मुस्लिम समुदाय के हितों के लिए काम करेंगे। कल बिल पेश किया जायेगा, उसके बाद ही हम इस पर कोई टिप्पणी करेंगे। मैं आपको भरोसा दिलाता हूं कि चंद्रबाबू नायडू मुसलमानों के पक्ष में हैं। लेकिन आगे क्या होता है इस पर सबकी निगाहें हैं।

वक्फ बिल पर प्रमुख आपत्तियां क्या
1. वक्फ के किसी संपत्ति विवाद पर अब फैसले के लिए खिलाफ हाइकोर्ट जा सकते हैं। हालांकि पहले वक्फ ट्रिब्यूनल का फैसला ही आखिरी माना जाता था।
अब दान किये बिना किसी संपत्ति पर वक्फ अपना अधिकार नहीं जता सकता, लेकिन इससे पहले दावे के साथ ही कोई भी संपत्ति वक्फ का अधिकार हो जाती थी।
वक्फ बोर्ड में महिला और अन्य धर्म से दो सदस्य होने चाहिए। लेकिन पहले बोर्ड में महिला और अन्य धर्म के सदस्य नहीं होते थे।
कलेक्टर वक्फ की संपत्ति का सर्वेक्षण कर सकेगा और उसे संपत्ति का निर्धारण करने का अधिकार दिया गया है।

Share.
Leave A Reply

Exit mobile version