………..लेखक भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद हैं – दीपक प्रकाश
प्रदेश कांग्रेस का महंगाई के खिलाफ आयोजित विरोध प्रदर्शन एक दिखावा है। अगर कांग्रेस को सचमुच में पेट्रोल-डीजल के कीमतों की चिंता है तो अपने शासन वाले राज्यों में टैक्स घटाकर राहत की घोषणा करे। तथ्यों को देखें तो पिछले महीने खुदरा मुद्रास्फीति की दर 6.26% और थोक मुद्रास्फीति की दर 12% रही। इसमें खाद्य पदार्थों की महंगाई दर 5.58% रही। इस हिसाब से खाद्य पदार्थों की महंगाई दर आरबीआई की 6% के ऊपरी सीमा के भीतर है। इसमें अनाज और सब्जियों की महंगाई दर क्रमश -1.94 और -0.70 रही, यानी इनके दामों में पिछले साल की तुलना में गिरावट आयी है। जून की खुदरा महंगाई दर केवल 4.39% रही। कुछ विशेष श्रेणी और पदार्थों में महंगाई जरूर आयी है जिसके कई कारण है। इसका सबसे बड़ा कारण कोरोना के कारण वैश्विक सप्लाई चेन में आयी दिक्कतें हैं जिसका असर पूरा विश्व झेल रहा है। वर्तमान में खाद्य पदार्थों की वैश्विक महंगाई दर 2011 के बाद से सबसे ऊंचे स्तर पर है। विश्व स्तर पर खाद्य पदार्थों की कीमत पिछले साल की तुलना में 40 प्रतिशत ज्यादा है। इसका एक और कारण विश्व के कई हिस्सों में आया अकाल है। इस हिसाब से भारत तुलनात्मक रूप से बहुत बेहतर स्थिति में है। इसके अलावा थोक महंगाई दर में आई बढ़ोतरी की सबसे बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई तेज बढ़ोत्तरी है। कच्चे तेल की कीमतें पिछले साल की तुलना में करीब दोगुनी हो गई है। भारत अपने तेल की जरूरतों का 80% हिस्सा आयात करता है और इसके कारण घरेलू कीमतें सीधे अंतरराष्ट्रीय बाजार से प्रभावित होती है। इसके अलावा यूपीए ने अपने शासन काल में तेल की कीमतों को न बढ़ने देने के लिए आॅयल बांड्स जारी किए थे। कांग्रेस की इस अदूरदर्शी नीति का बोझ भी केंद्र सरकार पर पड़ने जा रहा है। राज्य सरकार और कांग्रेस की ओर से पेट्रोल तथा डीजल पर लगने वाले टैक्स का ठीकरा भी सिर्फ केंद्र पर फोड़ना उचित नहीं है। झारखंड सरकार की ओर से डीजल पर वर्तमान में 23% वैट वसूला जा रहा है जो पड़ोस के राज्यों बिहार, बंगाल और उत्तर प्रदेश से 4-5% अधिक है। राज्य सरकार को महंगाई की अगर तनिक भी चिंता होती तो वो पेट्रोल तथा डीजल पर वैट घटाकर प्रदेशवासियों को राहत दे सकती थी। केंद्र सरकार ने महंगाई से मुकाबले के लिए जीएसटी जैसे दूरगामी परिणाम वाले और वर्षों से अटके मामले को धरातल पर उतारा। जीएसटी के लागू होते पिछले 4 सालों में वस्तुओं पर लगने वाले कुल टैक्स में औसतन 43% की कमी आई है जिससे आम उपभोक्ताओं के लिए ये वस्तुएं सस्ती हुई हैं। दूध जैसी जरूरत वाली वस्तुओं पर शून्य जीएसटी रखा गया है। राज्य सरकार की असंवेदनशीतला के विपरीत केंद्र की मोदी सरकार ने गरीब तबके के आय के स्रोतों में आई बाधाओं के मद्देनजर देश के 80 करोड़ लोगों के लिए नवम्बर तक मुफ्त अनाज देने का संकल्प लिया। पूरे देश में 18 वर्ष से अधिक आयु के सभी लोगों को मुफ्त कोविड टीकाकरण की घोषणा की। आय के साधनों में आयी कमी के बावजूद मोदी सरकार ने देशवासियों के सुख-दु:ख में सहयोगी बनने की कोई कसर नहीं छोड़ी। इन व्ययों के बावजूद आर्थिक मोर्चे पर वर्ष 2021 में भारत के चालू खाते में जीडीपी के अनुपात में 0.9% का अधिशेष रहा है। कांग्रेस के राज में वर्ष 2013 तक चालू खाता घाटा जीडीपी के अनुपात में 6.8% तक पहुंच चुका था जिसे मोदी सरकार ने पिछले 7 वर्षों में 2% के भीतर रखने में सफलता पायी है। इसके विपरीत कांग्रेस समर्थित राज्य की हेमंत सरकार के पास इस कठिन समय के लिए न कोई नीति है न इच्छाशक्ति। राज्य सरकार तो केंद्र द्वारा दिए जा रहे अनाज और अन्य सहायता को भी राज्य के जरूरतमंद लोगों तक पहुंचाने में असफल साबित हुई है। पूरी महामारी के दौरान राज्य के विभिन्न कोनों से इस आपदा को अवसर में बदलने वाले राज्य सरकार के नुमाइंदों की कहानियां सुनने को मिलती रही। टीकाकरण के दुष्प्रचार में भी कांग्रेस पार्टी बेनकाब हो चुकी है। टूलकिट प्रकरण ने कांग्रेस को कहीं का नहीं छोड़ा। ऐसे में यह पार्टी जनता के बीच सस्ती लोकप्रियता हासिल करना चाहती है। देश की जनता जानती है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश के खजाने का एक-एक पैसा गांव गरीब वंचित के लिए कल्याणकारी योजनाओं को लागू करने तथा देश की सुरक्षा मजबूत करने में खर्च हो रहा। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में भारत तीव्र गति से प्रगति के पथ पर अग्रसर हो रहा है। देश की जनता को उनपर पूरा भरोसा है।
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