पश्चिमी सिंहभूम। पश्चिमी सिंहभूम जिले में पिछले कई घंटों से लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने जनजीवन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। जिले के गुवा, सारंडा, बड़ाजामदा, किरीबुरू और आसपास के क्षेत्रों में भारी बारिश के कारण नदियां उफान पर हैं, जबकि कई निचले इलाकों में जलभराव से बाढ़ जैसे हालात उत्पन्न हो गए हैं। लगातार हो रही बारिश से सड़क संपर्क बाधित हो गया है और लोगों की दैनिक गतिविधियां भी प्रभावित हुई हैं।
गुवा के बोकना स्थित पंचमुखी हनुमान मंदिर के समीप कारो नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ने के कारण नदी पर बने पुल के ऊपर करीब चार फीट ऊंचाई तक पानी बहने लगा। पुल पूरी तरह जलमग्न होने से गुवा-बड़ाजामदा-किरीबुरू-चाईबासा मार्ग पर आवागमन ठप हो गया। कई यात्री घंटों तक पुल पर पानी कम होने का इंतजार करते रहे, जबकि जरूरी कार्य से निकलने वाले लोगों को लंबा वैकल्पिक मार्ग अपनाना पड़ा। कई स्थानों पर सड़क किनारे वाहन खड़े कर लोग पानी उतरने का इंतजार करते नजर आए।
भारी बारिश का असर केवल कारो नदी तक सीमित नहीं रहा। सारंडा और बड़ाजामदा क्षेत्र में भी जलभराव ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। बड़ाजामदा के मिडिल स्कूल, फुटबॉल मैदान और आसपास की बस्तियों में पानी भर जाने से बाढ़ जैसी स्थिति बन गई है। कई निचले इलाकों में घरों में पानी प्रवेश करना शुरू हो गया है, जिसके कारण लोग घरेलू सामान सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने में जुटे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि बारिश का सिलसिला इसी तरह जारी रहा तो कई और घर जलमग्न हो सकते हैं।
बारिश का प्रभाव करमपदा, छोटानागरा, गंगदा समेत सारंडा के कई गांवों में भी देखने को मिल रहा है। निचले इलाकों में पानी भर जाने से ग्रामीणों की आवाजाही प्रभावित हो गई है। वहीं कई स्थानों पर तेज हवा और बारिश के कारण सड़क पर पेड़ गिरने से यातायात बाधित हो गया। स्थानीय लोगों ने स्वयं पेड़ों की टहनियां हटाकर रास्ता साफ करने का प्रयास किया, जबकि कुछ स्थानों पर वाहन लंबे समय तक फंसे रहे।
मंगलवार को स्थानीय संतोष, रमेश हांसदा और अन्य नागरिकों का कहना है कि हर वर्ष बरसात के मौसम में कारो नदी का जलस्तर बढ़ने से बोकना पुल डूब जाता है और सारंडा-बड़ाजामदा क्षेत्र में जलभराव की समस्या विकराल रूप ले लेती है। इसके बावजूद अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया है। लोगों ने जिला प्रशासन से संवेदनशील क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्य तेज करने, जल निकासी की स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित करने तथा भविष्य में ऐसी स्थिति से निपटने के लिए प्रभावी योजना तैयार करने की मांग की है।



