कहा- बांग्लादेशी घुसपैठियों ने संथाल परगना की डेमोग्राफी को बदल दिया है
साढ़े चार साल पहले मंईयां योजना की शुरूआत क्यों नहीं की
रांची। जमशेदपुर के गोपाल मैदान में भारी बारिश के बावजूद पीएम मोदी को देखने और सुनने को उमड़ी भीड़ को देखते हुए भाजपा के निवर्तमान अध्यक्ष सह राज्यसभा सांसद दीपक प्रकाश ने इस कार्यक्रम की तुलना 1974 की सत्ता परिवर्तन के जेपी आंदोलन से करते हुए कहा कि आज नरेंद्र मोदी को सुनने इतनी भारी बारिश में कोल्हान की जनता जिस तादात में उमड़ पड़ी इसे देखते हुए मैं कह सकता हूं कि जिस प्रकार से इंदिरा गांधी सरकार की तानाशाही और निरंकुशता से तंग आकर देश की जनता सत्ता परिवर्तन के लिए आतुर थी और भारी बारिश होने के बाउजूद भी जेपी जी को सुनने भीड़ उमड़ी थी। ठीक उसी प्रकार से झारखंड के कोल्हान में भी वही दृश्य मोदी के कार्यक्रम में देखने को मिला। झारखंड की भी जनता हेमंत सोरेन सरकार के झूठ, भ्रष्टाचार, तुष्टिकरण की नीति से तंग आ चुकी है।
श्री प्रकाश ने कहा कि परिवर्तन रैली की भीड़ को देखकर यह आभास हो गया है कि राज्य की जनता हेमंत सरकार जो जनता को झूठे वादे कर और झूठे सपने दिखा कर सत्ता में आयी थी उसे अब उखाड़ फेंखने का मन बना चुकी है। यह सरकार राज्य की आदिवासी, दलित, महिला, किसान और युवाओं को सब्जबाग दिखा कर उनसे वोट लेने का काम की थी। लेकिन सत्ता हासिल होते ही यह सरकार दलालों और विचौलियों के माध्यम से राज्य की खनिज संपदाओं को लूटने में व्यस्त हो गयी। वोट बैंक बनाने की खातिर तुष्टिकरण की नीति पर काम करने लगी। राज्य में बांग्लादेशी घुसपैठियों ने संथाल परगना की डेमोग्राफी को बदल दिया है। राज्य की हेमंत सोरेन सरकार सबकुछ जानते हुए भी चुप है। बांग्लादेशी घुसपैठिये राज्य की आदिवासी और दलित बहनों को लव जिहाद में फंसा कर उनसे विवाह कर रहे हैं और उनकी जमीन हड़प रहे हैं। संथाल में आदिवासियों की जनसंख्या में भारी कमी आ गयी है। आने वाले समय में संथाल में आदिवासी खोजने से भी नहीं मिलेंगे।
श्री प्रकाश ने कहा कि हेमंत सरकार की गलत नीति के कारण उत्पाद सिपाही भर्ती में राज्य के होनहार युवक एवं युवतियों अपनी जान गवां चुके हैं। राज्य सरकार नौकरी नहीं बल्कि मौत बांट रही है।
उन्होंने कहा कि चुनाव से ठीक पहले मंईयां योजना के तहत महिलाओं को एक हजार रुपये दे रहे हैं। अगर हेमंत सोरेन राज्य की महिलाओं के प्रति इतनी ही सहानुभूति रखते हैं तो फिर साढ़े चार साल पहले इस योजना की शुरूआत क्यों नहीं की।