विशेष
सवर्णों के खिलाफ धनबाद सांसद की टिप्पणी से मचा सियासी हंगामा
ऐसे बयानों से विधानसभा चुनाव में झारखंड भाजपा को होगा नुकसान
लोकसभा चुनाव के प्रत्याशी चयन में सवर्णों को नाराज कर चुकी है पार्टी
नमस्कार। आजाद सिपाही विशेष में आपका स्वागत है। मैं हूं राकेश सिंह।
झारखंड की सत्ता दोबारा हासिल करने के लिए विधानसभा चुनाव जीतने की कोशिशों में जुटी भाजपा को रह-रह कर नयी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। अब पार्टी के सामने धनबाद के सांसद ढुल्लू महतो का विवादास्पद बयान बड़ी समस्या बन कर खड़ा हो गया है, जिसमें उन्होंने सवर्ण समाज के खिलाफ मर्यादित टिप्पणी की है। पहली बार सांसद बने ढुल्लू महतो का वैसे विवादों से गहरा नाता रहा है। लोकसभा चुनाव से पहले भी वह कई बार गंभीर विवादों में फंस चुके हैं। पूर्व सांसद रविंद्र पांडेय और पीएन सिंह के अलावा विधायक राज सिन्हा से उनके तनावपूर्ण रिश्तों की चर्चा हो चुकी है। फिर निर्दलीय विधायक सरयू राय के साथ उनकी तनातनी भी चर्चा में रही थी। अब ढुल्लू महतो सवर्णों के खिलाफ बयानबाजी कर खुद को ओबीसी-पिछड़ों का मसीहा साबित करने की कोशिश कर रहे हैं, तो इसका नुकसान अंतत: भाजपा को ही उठाना पड़ सकता है। ढुल्लू महतो के बयान के बाद पूरे झारखंड का सवर्ण समाज बिफर उठा है। लोकसभा चुनाव में भाजपा द्वारा सवर्ण प्रत्याशियों को नजरअंदाज किये जाने से यह समाज पहले से ही नाराज चल रहा है और अब ढुल्लू महतो ने इस आग को एक बार फिर भड़का कर पार्टी के लिए गंभीर समस्या खड़ी कर दी है। लोकसभा चुनाव के बाद भाजपा ने सवर्ण समाज को मनाने के लिए कई कोशिशें की हैं और मामला पटरी पर लौट ही रहा था, लेकिन अब ढुल्लू महतो ने खेल बिगाड़ दिया है। भाजपा को ऐसी बयानबाजी पर सख्ती से रोक लगानी होगी, क्योंकि आसन्न विधानसभा चुनाव में वह किसी भी वर्ग को नाराज करने का खतरा मोल नहीं ले सकती है। सवर्णों के बारे में क्या कहा सांसद ढुल्लू महतो ने और आसन्न विधानसभा चुनाव में क्या हो सकता है इसका असर, बता रहे हैं आजाद सिपाही के विशेष संवाददाता राकेश सिंह।
विधानसभा चुनाव जीत कर झारखंड की सत्ता को फिर से हासिल करने के लिए हरसंभव कोशिश में जुटी भाजपा के लिए नयी राजनीतिक परेशानी पैदा हो गयी है। यह परेशानी पार्टी के टिकट पर पहली बार सांसद बने ढुल्लू महतो ने पैदा कर दी है, जिन्होंने सवर्णों के खिलाफ बयान देकर मामले को इस कदर बिगाड़ दिया है कि भाजपा को इसे सुलझाने में पूरी ताकत लगानी पड़ रही है। पार्टी ने कार्रवाई करने का संकेत तो दिया है, लेकिन इससे बात बनती नहीं दिख रही है।
क्या कहा ढुल्लू महतो ने
दो दिन पहले धनबाद से भाजपा सांसद ढुल्लू महतो ने कहा कि ओबीसी वोटों को एकजुट करना जरूरी है, क्योंकि सवर्ण समाज को आगे बढ़ाने से समाज का भला नहीं हो सकता है। इसके बाद उन्होंने जमशेदपुर में निर्दलीय विधायक सरयू राय के खिलाफ आक्रामक बयान दे दिया। उन्होंने कहा कि सरयू राय ओबीसी विरोधी हैं और आगामी विधानसभा चुनाव में ओबीसी समाज उन्हें हरा कर उनकी राजनीतिक पारी खत्म करेगा। उन्होंने सरयू राय का ‘राजनीतिक वध’ करने की भी बात कही। ढुल्लू महतो यहीं नहीं रुके। उन्होंने सरयू राय पर कई आरोप लगाये और उन्हें ‘सबसे भ्रष्ट राजनेता’ के अलावा ‘अपराधियों को संरक्षण देनेवाला’ बताया। सांसद ने कहा कि सरयू राय जैसे व्यक्ति का जनप्रतिनिधि होना समाज के लिए कलंक है। सरयू राय को ओबीसी समुदाय पसंद नहीं है और इसीलिए वह इस समुदाय के जनप्रतिनिधियों के खिलाफ बयानबाजी करते हैं। सांसद ने कहा कि सरयू राय कभी भी भाजपा के टिकट पर चुनाव नहीं लड़ सकते हैं। अन्य सहयोगी दलों को भी उनकी असलियत पहचाननी होगी। विधायक सरयू राय के काले कारनामों का पूरा सबूत उनके पास है और वे परत दर परत उसे उजागर करेंगे।
सरयू राय ने किया पलटवार
ढुल्लू महतो के बयान पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए विधायक सरयू राय ने कहा कि उन्होंने ढुल्लू महतो का बयान वाला वीडियो देखा और सुना भी, जिसमें पूर्व मुख्यमंत्री रघÞुवर दास के भांजे ढुल्लू महतो के साथ थे। इससे साफ पता चलता है कि मेरे खिलाफ बयानबाजी के लिए ढुल्लू महतो को जमशेदपुर लाया गया है। उन्होंने कहा कि ढुल्लू महतो चार मामले में सजायाफ्ता हैं। साथ ही उनके खिलाफ 45 आपराधिक मामले भी दर्ज हैं, जिन पर सुनवाई चल रही है। ढुल्लू महतो ने बाघमारा क्षेत्र के दर्जनों किसानों की दो सौ एकड़ जमीन हड़प ली है और जेल से भी ऊंची दीवार से घेराबंदी कर दी है। सरयू राय ने कहा कि ढुल्लू महतो ने उनके रिश्तेदारों को बुरी तरह प्रताड़ित किया है। उनकी जमीन पर भी कब्जा कर लिया है। इस मामले में पीड़ित परिवार वालों ने मुझसे मदद मांगी थी। मैंने उन्हें न्याय दिलाने का आश्वासन दिया है। उन लोगों से लगातार फोन पर बात हो रही है। सरयू राय ने कहा कि ढुल्लू महतो ने मेरे खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया है। इस मामले में मै अपने वकील से राय मशविरा कर उनके खिलाफ नोटिस भेजूंगा। सरयू राय ने साफ तौर पर कहा कि मुझे जब कोई निमंत्रण देता है, तो मैं उसे पूरा करता हूं। मैं घबराने वाला नहीं हूं।
सरयू राय और ढुल्लू महतो की पुरानी रंजिश
यह पहली बार नहीं है जब ढुल्लू महतो और सरयू राय आमने-सामने आये हैं। लोकसभा चुनाव से ही दोनों नेताओं के बीच सार्वजनिक रूप से आरोप-प्रत्यारोप होते रहे हैं। ढुल्लू महतो का ताजा बयान इस पुरानी राजनीतिक दुश्मनी का ही हिस्सा माना जा रहा है, जो अब भाजपा के लिए सिरदर्द बनता जा रहा है।
ढुल्लू महतो के बयान से सवर्णों में नाराजगी
इस बीच ढुल्लू महतो के इस बयान के बाद कई सवर्ण नेता नाराजगी जाहिर कर रहे हैं। सवर्ण समाज के कुछ प्रमुख नेताओं ने इसे अपने अपमान से जोड़ते हुए सोशल मीडिया पर रोष व्यक्त किया है। इस घटनाक्रम के बाद भाजपा के भीतर और बाहर भी असंतोष बढ़ता दिख रहा है। इससे भाजपा में भी बेचैनी है। पार्टी को इस बयान का असर आसन्न विधानसभा चुनाव में पड़ने का डर सताने लगा है। इसलिए पार्टी फिलहाल रक्षात्मक मुद्रा में आ गयी है। पार्टी ने सांसद ढुल्लू महतो को नोटिस जारी करने की तैयारी शुरू कर दी है, क्योंकि वह विधानसभा चुनाव में सवर्णों की नाराजगी का खतरा मोल नहीं ले सकती। लेकिन अब तक जिस तरह से ढुल्लू महतो को पूरी तरह छूट मिली हुई है उससे नहीं लगता कि पार्टी की ओर से उन्हें नोटिस भेजा जायेगा। सच तो यही है कि आज की तारीख में कोई भली नेता ढुल्लू महतो को नसीहत देने की स्थिति में है ही नहीं। वह किसी की नहीं सुननेवाले।
आंतरिक कलह से बढ़ी पार्टी की चिंता
भाजपा के लिए चुनावी समय में यह बयान चिंता का विषय बन गया है। पार्टी के नेताओं का मानना है कि ढुल्लू महतो के इस विवादित बयान से चुनाव में नुकसान की आशंका है। प्रदेश भाजपा इस बयान को गंभीरता से लेते हुए जल्द ही सांसद को कारण बताओ नोटिस जारी कर सकती है और चुनाव तक ऐसे बयान देने से परहेज करने की सलाह दे सकती है।
भाजपा के कोर वोटर हैं सवर्ण
झारखंड में सवर्ण भाजपा के कोर वोटर माने जाते हैं। पार्टी ने इस साल हुए लोकसभा चुनाव में तीन सवर्ण सांसदों, जयंत सिन्हा (हजारीबाग), सुनील सिंह (चतरा) और पीएन सिंह (धनबाद) का टिकट काट दिया था। इससे पहले 2019 में पार्टी ने रविंद्र पांडेय की गिरिडीह सीट आजसू के लिए छोड़ दी थी। भाजपा के इन फैसलों से सवर्ण समाज नाराज तो हुआ, लेकिन उसने पार्टी का साथ नहीं छोड़ा। भाजपा द्वारा राज्य की आठ संसदीय सीटों पर जीत हासिल करने के पीछे बड़ा कारण सवर्ण समुदाय का एकजुट होकर उसके पक्ष में वोट करना रहा। धनबाद से ढुल्लू महतो को टिकट देने का दुष्परिणाम यह हुआ कि भाजपा की जीत का अंतर पांच लाख से घट कर ढाई लाख पर पहुंच गया। इसके बावजूद न तो भाजपा को इसको लेकर कोई चिंता हुई और न ही ढुल्लू महतो को। ऐसे में अब भाजपा को समझना होगा कि गैर-जिम्मेदारी वाला बयान देकर उसका कोई नेता पार्टी के लिए परेशानी पैदा नहीं करे। ढुल्लू महतो जैसे नेता यदि इसी तरह बिन सोचे-समझे बयान देते रहेंगे, तो भाजपा की चुनावी राह कठिन होती जायेगी।