विशेष
टुंडी ही एकमात्र सीट, जहां 1995 के बाद से नहीं खिला कमल
भाजपा के संस्थापक सत्यनारायण दुदानी ने जलाया था जनसंघ का दीया
टुंडी में भाजपा के लिए दीवार बनकर खड़ा है झामुमो, चक्रव्यूह भेदना मुश्किल
नमस्कार। आजाद सिपाही विशेष में आपका स्वागत है। मैं हूं राकेश सिंह।
झारखंड विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण के नामांकन की प्रक्रिया जारी है। शुक्रवार को रिकॉर्ड 409 उम्मीदवारों ने अपना-अपना पर्चा भरा, जिसमें कई दिग्गज नेता शामिल हैं। पहले चरण की 43 सीटों पर 804 उम्मीदवारों ने नामांकन किया है, जबकि दूसरे चरण की 38 सीटों पर अबतक 93 नामांकन हुए हैं। दूसरे चरण के चुनाव के लिए नामांकन की अंतिम तिथि 29 अक्टूबर निर्धारित है। पहले चरण के नामांकन की जांच 28 अक्टूबर को होगी और उम्मीदवार 30 अक्टूबर तक नामांकन वापस ले सकते हैं। दूसरे चरण के नामांकन की जांच 30 अक्टूबर को होगी और प्रत्याशी एक नवंबर तक नाम वापस ले सकते हैं। झारखंड में पहले चरण में 43 सीटों पर 13 नवंबर को तथा दूसरे चरण में 38 सीटों पर 20 नवंबर को मतदान होना है। इस बार कई ऐसे नेता मैदान में हैं, जो लोकसभा चुनाव में उपविजेता रहे थे। इनमें से नौ को उनके दलों ने फिर से टिकट दिया है। भाजपा और झामुमो ने तीन-तीन, कांग्रेस ने दो और भाकपा माले ने अपने एकमात्र उपविजेता प्रत्याशी को फिर से उम्मीदवार बनाया है।
सिर्फ पलामू संसदीय सीट की उपविजेता ममता भुइयां को राजद से टिकट नहीं मिला है। इन सब के बीच धनबाद और बोकारो विधानसभा सीट से कांग्रेस ने अभी तक उम्मीदवार की घोषणा नहीं की है, जबकि काफी जद्दोजहद के बाद भाजपा के पाले की सीट टुंडी विधानसभा सीट का पेंच सुलझ गया है। भाजपा ने टुंडी विधानसभा सीट से विकास महतो को अपना प्रत्याशी बनाया है। पहले सियासी अटकलें और टुंडी विधानसभा क्षेत्र में बढ़ती राजनीतिक गतिविधियां और बनते-बिगड़ते समीकरण के बीच आजसू सुप्रीम सुदेश महतो की टुंडी से लड़ने की बात सुर्खियों में थी। सुदेश महतो की सर्वे टीम टुंडी विधानसभा क्षेत्र में जनता से संवाद बनाते हुए आकलन में जुटी हुई थी। झामुमो ने अपने सीटिंग विधायक मथुरा प्रसाद महतो पर भरोसा जताते हुए एक बार फिर टुंडी से टिकट दिया है और वे नॉमिनेशन कर चुके हैं। वहीं मथुरा के सामने एनडीए गठबंधन की तरफ से विकास महतो को उतारा गया है। टुंडी विधानसभा क्षेत्र दिशोम गुरु झारखंड मुक्ति मोर्चा के संस्थापक शिबू और विनोद बिहारी महतो की कर्मभूमि रही है। वहीं टुंडी विधानसभा सीट भाजपा के लिए भी खास मायने रखता है। टुंडी भाजपा के लिए वह क्षेत्र है, जहां जनसंघ की नींव भाजपा के संस्थापक और जनसंघ के सदस्य रहे सत्यनारायण दुदानी ने 1969 में रखी थी और विधायक बने। लेकिन अब यह जेएमएम का गढ़ बन गया है। वर्तमान में धनबाद जिले में टुंडी ही एकमात्र सीट है, जहां 1995 के बाद से कमल नहीं खिला है। भाजपा ने धनबाद जिले के सभी विधानसभा क्षेत्रों में केसरिया झंडा लहराया, लेकिन जहां जनसंघ का दीया जला, उस टुंडी में आज भी भाजपा के लिए कमल फूल खिलाना चुनौती बना हुआ है। टुंडी विधानसभा में क्यों जेएमएम मजबूत है और क्या है सियासी समीकरण तथा भाजपा की चुनौती, बता रहे हैं आजाद सिपाही के विशेष संवाददाता मनोज मिश्र।
धनबाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का गढ़ माना जाता है। धनबाद जिला के छह विधानसभा क्षेत्रों में सिंदरी, बाघमारा, निरसा और धनबाद विधानसभा क्षेत्र से भाजपा के मौजूदा विधायक हैं। झरिया विधानसभा सीट पर भी दो दशक तक भाजपा का कब्जा रहा। साल 2019 में झरिया में 52 साल बाद कांग्रेस जीती। भाजपा ने निरसा जीत कर लाल झंडा को धनबाद जिला से उखाड़ फेंका, लेकिन दुर्भाग्य देखिए कि संयुक्त बिहार में जनसंघ और भाजपा के संस्थापक रहे दिग्गज नेता सत्यनारायण दुदानी ने जिस टुंडी विधानसभा क्षेत्र में जनसंघ का दिया जलाया था, वहां आज भी भाजपा के लिए कमल फूल खिलाना चुनौती है।
धनबाद जिले में टुंडी ही एकमात्र सीट है, जहां 1995 के बाद से कमल नहीं खिला है। इस विधानसभा सीट से सिर्फ सत्यनारायण दुदानी ही भाजपा के टिकट पर एक बार 1985 में जीते हैं। सत्यनारायण दुदानी पहली बार यहां भारतीय जनसंघ से 1969, दूसरी बार जनता पार्टी से 1977 और तीसरी बार भाजपा से 1985 में चुनाव जीते थे। 1990 के चुनाव में दुदानी झामुमो के संस्थापक बिनोद बिहारी महतो से चुनाव हार गये। इसके बाद से यह क्षेत्र परंपरागत रूप से पिछले तीन-चार दशकों से झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) का गढ़ बन गया है।
सत्यनारायण दुदानी ने टुंडी के जिस गादी टुंडी में जिस सरस्वती विद्या मंदिर की स्थापना की थी, वहां भाजपा का परचम टुंडी में लहराने का मंथन किया जाता है। किसानों, नौजवानों, महिलाओं, छात्रों को कैसे अधिक से अधिक जोड़कर भाजपा को टुंडी से जीत दिलाने का संकल्प लिया जाता है। लेकिन झामुमो के चक्रव्यूह को भेदने की भाजपा के समक्ष चुनौती बरकरार है।
सियासी गलियारों में चर्चा खास थी कि इस बार भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) आजसू पार्टी सुप्रीमो सुदेश महतो को मैदान में उतार कर इस सीट पर जीत हासिल करने की रणनीति बना रही है। हालांकि ऐसा नहीं हुआ और भाजपा ने विकास महतो को प्रत्याशी बनाया है।
जेएमएम के कद्दावर नेता और पूर्व मंत्री मथुरा प्रसाद महतो तीन बार इस सीट से चुनाव जीत चुके हैं। मुकाबले को और दिलचस्प बनाने के लिए जयराम महतो ने भी ऐलान किया था कि यदि सुदेश महतो टुंडी से मैदान में उतरते हैं, तो वो भी वहां से चुनाव लड़ेंगे। बता दें कि भारत निर्वाचन आयोग के अनुसार टुंडी विधानसभा सीट के लिए दूसरे चरण में 20 नवंबर को वोट डाले जायेंगे।
भाजपा के समक्ष मजबूत चुनौती बनकर खड़ा है झामुमो
झामुमो के संस्थापक बिनोद बिहारी महतो और अध्यक्ष शिबू सोरेन की इस राजनीतिक जन्मभूमि टुंडी में भाजपा के समक्ष मजबूत चुनौती बनकर आज भी झामुमो खड़ा है। झामुमो के चक्रव्यूह को भेदने की भाजपा के समक्ष चुनौती है। प्रदेश भाजपा नेतृत्व इसके लिए कई चुनावों से मंथन कर रहा है, लेकिन सफलता आज भी दूर है। भाजपा के समर्थन से आजसू जरूर यहां एक बार 2014 के चुनाव में सफल रही है। झामुमो अध्यक्ष बिनोद बिहारी महतो के पुत्र व पूर्व सांसद राजकिशोर महतो को प्रत्याशी बनाकर आजसू यहां झामुमो को हराने में सफल रही थी। इसके अगले चुनाव में जैसे ही आजसू-भाजपा गठबंधन टूटा, झामुमो ने भाजपा को 25 हजार 659 वोटों के बड़े अंतर से पराजित कर फिर से इस सीट पर कब्जा कर लिया। साल 2019 के चुनाव में झामुमो के टिकट पर मथुरा प्रसाद महतो विधायक बने। साल 2019 में भाजपा ने पूर्व गिरिडीह सांसद (वर्तमान में बेरमो से भाजपा उम्मीदवार) रवींद्र पांडेय के पुत्र विक्रम पांडेय को टुंडी विधानसभा सीट से उम्मीदवार बनाया था।
विक्रम पांडेय को 46893 वोट मिले जबकि, झामुमो के मथुरा के खाते में 32 फीसदी 72552 वोट पड़े। मथुरा ने 13.4 फीसदी के वोट अंतर से भाजपा के विक्रम पांडेय को हराया।
आसन्न विधानसभा चुनाव-24 के लिए एकबार फिर झामुमो के टिकट पर टुंडी विधानसभा सीट से सीटिंग विधायक मथुरा प्रसाद महतो नॉमिनेशन कर चुके है। वहीं भाजपा ने विकास महतो को उतारा है। भाजपा ने धनबाद जिले की सभी छह सीटों से उम्मीदवारों की घोषणा कर चुकी है।
टुंडी में भाजपा का जनाधार है। अटकलें थीं कि आजसू सुप्रीम सुदेश महतो टुंडी विधानसभा सीट से चुनाव लड़ सकते हैं। बीते दो महीने में सुदेश ने टुंडी विधानसभा क्षेत्र में कई कार्यक्रम और सभा किया है। सुदेश महतो की सर्वे टीम भी पिछले कई दिन से टुंडी विधानसभा क्षेत्र में स्थानीय लोगों की राय के साथ माहौल भांप रही थी। वहीं भाजपा के वरिष्ठ नेता और समर्थकों ने चुनाव की घोषणा के साथ ही टुंडी से भाजपा उम्मीदवार उतारने की मांग तेज कर दी थी। राजनीतिक गतिविधियां भी तेज होती जा रही थी। इस बार की चुनावी दंगल में टुंडी सीट पर सभी की नजरें टिकी हुई थीं। टुंडी में विकास महतो को जेएमएम के कद्दावर नेता मथुरा प्रसाद महतो से टक्कर मिलनी है, जबकि जयराम महतो की मौजूदगी से मुकाबला त्रिकोणीय भी हो सकता है। जयराम महतो टुंडी के स्थानीय निवासी हैं और क्षेत्र में उनकी अच्छी पकड़ मानी जाती है।
मतदाताओं की राय में भी स्पष्ट विभाजन
स्थानीय स्तर पर टुंडी विधानसभा क्षेत्र के मतदाताओं की राय में भी स्पष्ट विभाजन देखने को मिल रहा है। कुछ मतदाता मौजूदा झामुमो सरकार की उपलब्धियों की सराहना कर रहे हैं, जबकि अन्य लोग भाजपा की नीतियों को बेहतर मानते हैं। जिन मतदाताओं का विचार एनडीए के पक्ष में हैं, वे कहते हैं कि सरकारी स्कूलों और अस्पतालों की स्थिति में सुधार की आवश्यकता है और इसे लेकर एनडीए ही ठोस कदम उठा सकती है। मतदाताओं का मानना है कि अबकी बार परिवर्तन आवश्यक है, ताकि क्षेत्र का वास्तविक विकास हो सके। जबकि कुछ का मानना है कि केवल बदलाव से ही नेताओं को उनकी जिम्मेदारियों का अहसास होता है।
वहीं कुछ अन्य मतदाता झामुमो की सरकार के कार्यों से संतुष्ट हैं। इनका मानना है कि झामुमो की सरकार ने क्षेत्र में विकास कार्य किये हैं। उनके अनुसार, झामुमो सरकार में सड़कों का निर्माण हुआ, गरीबों के लिए योजनाएं लायी गयीं और महिलाओं के सम्मान के लिए कई कदम उठाये गये। मतदाताओं का कहना है कि झामुमो की सरकार ने महिलाओं को उनका हक और अधिकार दिलाने में अहम भूमिका निभायी है। मतदाताओं के उत्साह से साफ है कि टुंडी में मुकाबला इस बार काफी कड़ा और रोमांचक रहेगा।
टुंडी विधानसभा का सियासी गणित
टुंडी विधानसभा क्षेत्र में मुस्लिम आबादी करीब 17 प्रतिशत, महतो-कुर्मी की आबादी 15, मंडल पांच और मांझी की आबादी करीब चार प्रतिशत है। इस लिहाज से सिंदरी और निरसा विधानसभा की तरह टुंडी विधानसभा का सियासी गणित ‘ट्रिपल एम’ पर आधारित है। ‘ट्रिपल एम’ का मतलब महतो, मांझी और मुस्लिम आबादी से है। बताया जाता है कि टुंडी की जनसंख्या में महतो, मांझी और मुस्लिम समुदाय का बहुमत है, जिसे ‘ट्रिपल एम’ के नाम से भी जाना जाता है। इनमें से किन्हीं दो समुदायों का समर्थन किसी भी उम्मीदवार की जीत सुनिश्चित कर सकता है।
जेएमएम को हमेशा से ही इन समुदायों का समर्थन मिलता रहा है। बीते लोकसभा चुनाव-24 में गिरिडीह संसदीय सीट से एनडीए में शामिल घटक दल आजसू पार्टी प्रत्याशी चंद्रप्रकाश चौधरी की जीत हुई, लेकिन इस संसदीय क्षेत्र में शामिल टुंडी विधानसभा सीट से जेएमएम को बढ़त मिली। लोकसभा चुनाव में मथुरा प्रसाद महतो ही इंडिया अलायंस के प्रत्याशी थे और उन्होंने अपने टुंडी विधानसभा क्षेत्र में बढ़त बनाने में सफलता हासिल की। हालांकि, टुंडी विधानसभा क्षेत्र में करीब 50 से 55 हजार ब्राह्मण वोटर हैं, (जो 1932 खतियान में आते हैं) लेकिन आज तक इस विधानसभा क्षेत्र में स्थानीय ब्राह्मण प्रत्याशी को टिकट ही नहीं मिला है। 36 ऐसे गांव हैं, जहां कान्यकुब्ज ब्राह्मणों की संख्या है और 25 से 30 हजार के करीब कान्यकुब्ज ब्राह्मण वोटर हैं। वहीं यादव, मायरा मोदक, मंडल, कुम्हार, धोबी, रजवार, दास, रविदास, मोहली आदि वोटर हैं।
टुंडी विधानसभा क्षेत्र में 1969 से अब तक विधायक
2019 : मथुरा प्रसाद महतो, झामुमो
2014 : राजकिशोर महतो, आजसू
2009 : मथुरा प्रसाद महतो, झामुमो
2005 : मथुरा प्रसाद महतो, झामुमो
2000 : डॉ. सबा अहमद, राजद
1995 : डॉ. सबा अहमद, झामुमो मार्डी
1991 उप चुनाव : डॉ. सबा अहमद, झामुमो
1990 : बिनोद बिहारी महतो, झामुमो
1985 : सत्य नारायण दुदानी, भाजपा
1980 : बिनोद बिहारी महतो, झामुमो
1977 : सत्यनारायण दुदानी, जनता पार्टी
1972 : सत्यनारायण सिंह, कांग्रेस
1969 : सत्यनारायण दुदानी, जनसंघ