Close Menu
Azad SipahiAzad Sipahi
    Facebook X (Twitter) YouTube WhatsApp
    Monday, June 15
    • Jharkhand Top News
    • Azad Sipahi Digital
    • रांची
    • हाई-टेक्नो
      • विज्ञान
      • गैजेट्स
      • मोबाइल
      • ऑटोमुविट
    • राज्य
      • झारखंड
      • बिहार
      • उत्तर प्रदेश
    • रोचक पोस्ट
    • स्पेशल रिपोर्ट
    • e-Paper
    • Top Story
    • DMCA
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Azad SipahiAzad Sipahi
    • होम
    • झारखंड
      • कोडरमा
      • खलारी
      • खूंटी
      • गढ़वा
      • गिरिडीह
      • गुमला
      • गोड्डा
      • चतरा
      • चाईबासा
      • जमशेदपुर
      • जामताड़ा
      • दुमका
      • देवघर
      • धनबाद
      • पलामू
      • पाकुर
      • बोकारो
      • रांची
      • रामगढ़
      • लातेहार
      • लोहरदगा
      • सरायकेला-खरसावाँ
      • साहिबगंज
      • सिमडेगा
      • हजारीबाग
    • विशेष
    • बिहार
    • उत्तर प्रदेश
    • देश
    • दुनिया
    • राजनीति
    • राज्य
      • मध्य प्रदेश
    • स्पोर्ट्स
      • हॉकी
      • क्रिकेट
      • टेनिस
      • फुटबॉल
      • अन्य खेल
    • YouTube
    • ई-पेपर
    Azad SipahiAzad Sipahi
    Home»विशेष»जिसे कोड़ा दंपति ने तराशा, आज उसी से चुनावी लोहा लेना पड़ रहा है
    विशेष

    जिसे कोड़ा दंपति ने तराशा, आज उसी से चुनावी लोहा लेना पड़ रहा है

    shivam kumarBy shivam kumarOctober 2, 2024No Comments8 Mins Read
    Facebook Twitter WhatsApp Telegram Pinterest LinkedIn Tumblr Email
    Share
    Facebook Twitter WhatsApp Telegram LinkedIn Pinterest Email

    कोल्हान का रण-पार्ट 3
    लोकप्रियता कम नहीं है, लेकिन पांच सालों में जनता के बीच उनकी उपस्थिति कम रही
    झामुमो-कांग्रेस की रणनीति को भेदना बड़ा चैलेंज है कोड़ा दंपति के लिए

    चाइबासा की राजनीतिक जमीन और वहां की राजनीतिक संभावनाओं को टटोलने के बाद, आजाद सिपाही की टीम पहुंच गयी जगन्नाथपुर। जगन्नाथपुर जाने के क्रम में कई गांवों में हम रुके। लोगों का मन टटोला। यहां हो जाति के आदिवासी ज्यादा हैं। हो जाति की आदिवासी महिलाओं का पहनावा संथाली महिलाओं से अलग है। इन गावों के भ्रमण के दौरान एक घर की तस्वीर ने मुझे बहुत प्रभावित किया। छोटा खुला मिट्टी का घर। संसाधन भी नगण्य, खाने-पीने का भी अभाव दिखाई पड़ा। वहां तीन छोटे-छोटे बच्चे दिखे। एक बच्ची के हाथों में किताब थी वह पढ़ाई कर रही थी। दो बच्चों के तन पर कपड़े नहीं थे। सिर्फ पैंट पहन रखी थी उन्होंने। किसी ने सच ही कहा है कि जिसे विद्या चाहिए, वह कहीं से भी हासिल कर लेता है। बड़ा ही भावुक दृश्य। हमारी टीम जगन्नाथपुर के करीब पहुंच रही थी। सिरिंग्सिया घाटी के खत्म होते ही एक बाजार दिखा। वहां कई प्रकार के मशरूम ग्रामीण बेच रहे थे। वैराइटीज इतनी कि शहरों में कभी देखी नहीं। करीब 10 प्रकार के मशरूम थे वहां। इसे ग्रामीण छत्तू बोल रहे थे। उसका पूरा वीडियो आप आजाद सिपाही के यूट्यूब चैनल पर देख सकते हैं। बड़े ही ईमानदार लोग थे। वाजिब दाम और ताजा मशरूम्स। ये मतदाता भी थे। कुछ तीर धनुष वाले थे तो कुछ भाजपा के। इनमें कुछ महतो भी थे। वे भाजपा के वोटर्स थे। जैसे ही हम जगन्नाथपुर पहुंचे, वहां का नजारा ही कुछ और था। शहर पोस्टरों से पटा पड़ा था। लग रहा था कि कोई पोस्टर वॉर छिड़ा हो। कहीं भाजपा की परिवर्तन यात्रा के पोस्टर्स तो कहीं मंईयां सम्मान योजना के पोस्टर्स ,तो कहीं कांग्रेस जेएमएम के झंडे तो कहीं भाजपा के झंडे। शहर में कदम रखते ही पता चल गया कि यहां चुनावी गर्मी ज्यादा है। यहां मधु कोड़ा, गीता कोड़ा के नामों की चर्चा तो हो ही रही थी, सोनाराम सिंकू भी छाये हुए थे। इसलिए नहीं कि वह वहां के विधायक हैं, बल्कि इसलिए कि बनाया तो उन्हें मधु कोड़ा ने ही है। यहां कोड़ा दंपत्ति का मुकाबला उनके खुद की साख से है। उनके द्वारा बनायी गयी खुद की ताकत से है। लोकसभा अगर गीता कोड़ा हारीं, तो उसके पीछे भी कई कहानी है। क्या है जगन्नाथपुर की राजनीतिक तस्वीर और स्थिति बता रहे हैं आजाद सिपाही के विशेष संवाददाता राकेश सिंह।

    जगन्नाथपुर का चौराहा। राजनीतिक दलों के पोस्टर्स और झंडों से भरा हुआ। गाड़ी से उतरा तो यहां काफी संख्या में कांग्रेस और जेएमएम के कार्यकर्ता दिखे। पता चला कि कल्पना सोरेन आ रही हैं। चार बजे सभा होनी है। उसमें करीब चार घंटे का वक्त था। लेकिन जेएमएम कार्यकर्ता चार घंटा पहले से उनके आने की तैयारी में लगे हुए थे। इससे यह आभास हुआ कि जेएमएम कार्यकर्ताओं में कल्पना सोरेन को लेकर कितना उत्साह है। मैंने सोचा कि पहले क्षेत्र घुमा जाये। जनता से बातचीत के क्रम में पता चला कि चौक पर जो दुकानें थीं, उनमें 90 प्रतिशत दुकानें किसी खास वर्ग से थीं। वे खास दल के समर्थक भी थे। वहां पर हमने कुछ-कुछ का मन टटोला। लेकिन सच्चाई से अलग एक-दूसरे के प्रति घृणा का भाव ही ज्यादा दिखा। हम उससे कुछ आगे बढ़े। वह इलाका मुसलिम मतदाता बहुल था। जितने भी मुस्लिम मतदाताओं से मैंने बात की, सभी ने गीता कोड़ा द्वारा क्षेत्र में किये गये कामों की सराहना की। उनका कहना था कि उन्होंने बेहतरीन काम किया है। भले हम लोग मुसलमान हैं और वह भाजपा में चली गयी हैं, लेकिन उनके द्वारा किये गये कामों को नकारा नहीं जा सकता। शिक्षा के क्षेत्र में उन्होंने बहुत काम किया है। हां उनकी शिकायत यह जरूर थी कि पार्टी बदल कर उन्होंने अच्छा नहीं किया। उनका कहना था कि गीता कोड़ा को भाजपा में नहीं जान चाहिए था। मैंने पूछा अगर काम किया है, तो पार्टी बदलने से क्या फर्क पड़ना चाहिए। उनका कहना था कि नहीं फर्क तो पड़ता ही है। उन्होंने कहा कि आपने देखा नहीं, जब गीता कोड़ा कांग्रेस में थीं और महागठबंधन की उम्मीदवार थीं तो कैसे उन्होंने लोकसभा चुनाव में तहलका मचा दिया, लेकिन वही जब भाजपा में गयीं तो कैसे लोकसभा चुनाव में उनकी हार हो गयी।

    उसके बाद हमने प्रसंग बदल दिया। फिर दूसरे लोगों से बात छिड़ गयी कि क्या कांग्रेस विधायक सोनाराम सिंकू को टिकट मिलेगा या फिर यहां जेएमएम उम्मीदवार देगा। उस पर इंडी एलायंस के वोटर्स का कहना था कि सोनाराम सिंकू ने बेहतरीन काम किया है। क्षेत्र में मोटर साइकिल से भी घूम-घूम कर लोगों की मदद करते रहते हैं। सोनाराम सिंकू के बारे में लोगों का कहना है कि वह न दिन देखते हैं न रात, वह अपने क्षेत्र की जनता के लिए हमेशा खड़े रहते हैं।

    लेकिन इस सीट पर एक अलग ही दावा चल रहा है। जेएमएम समर्थक कहते हैं कि यह सीट जेएमएम को मिलनी चाहिए और मंगल सिंह बोबोंगा को मिलनी चाहिए। क्योंकि मधु कोड़ा को टक्कर यही देते थे। वहीं कांग्रेस वाले सोनाराम सिंकू का पक्ष रखते हैं। लेकिन कई मुस्लिम मतदाता मिले, जिन्होंने कांग्रेस से ज्यादा जेएमएम को तरजीह दी। इससे यह पता चला कि जेएमएम का संगठन कितना मजबूत हो गया है कोल्हान में। वैसे सोनाराम सिंकू के बारे में कहा जाता है कि उन्होंने विधायकी मधु कोड़ा की बदौलत जीती। लेकिन आज यही सोनाराम सिंकू कोड़ा दंपति के सामने चुनौती बन कर खड़े हैं। वहीं मधु कोड़ा के बारे में लोग कहते हैं कि जिस राजनीतिक पिच पर गीता कोड़ा बैटिंग कर रही हैं, वह मधु कोड़ा द्वारा ही बनायी गयी है। जितनी पकड़ इस क्षेत्र में मधु कोड़ा की है शायद ही किसी की हो। लेकिन लोकसभा चुनाव में गीता कोड़ा की हार ने मधु कोड़ा की राजनीतिक पकड़ पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया। तह तक जाने में पता चला कि यहां खेल कुछ और ही चल रहा था। गीता कोड़ा की हार में बहुत बड़ा रोल एक व्यक्ति का था, जिसने मधु कोड़ा को कह दिया कि आपकी छवि से लोगों में नाराजगी है, आप ज्यादा मत घूमिये। मधु कोड़ा इस चाल को समझ नहीं पाये। वहीं दीपक बिरुआ जो चाइबासा से विधायक हैं और अब मंत्री, ने जोबा मांझी के लिए ऐसी रणनीति बना डाली कि कोड़ा दंपति इसे भेद नहीं सका। चुनाव का चेहरा जोबा मांझी जरूर थीं, लेकिन लड़ रहे थे दीपक बिरुआ ही। हर विधानसभा सीट पर हर एक पहलू पर काम किया गया था। यहां तक कि गांव के प्रमुख व्यक्तियों तक पहुंच बनायी गयी थी, जिनकी अहम भूमिका रहती है चुनाव में। बूथ पर तो मानो एक कम्पटीशन लग गया था कि कौन बेहतर काम करे। दीपक बिरुआ ने ऐसी सटीक रणनीति बनायी कि कोड़ा दंपति उसे भांप नहीं सके। इस रणनीति को मधु कोड़ा बिल्कुल भेद लेते, लेकिन लोगों का कहना है कि बीते पांच सालों से कोड़ा दंपति में अलग ही घमंड प्रवास करने लगा था। वे कार्यकर्ताओं और जनता से कट गये थे। उन्हें लगने लगा था कि काम की बदौलत जनता उन्हें वोट दे ही देगी। लेकिन जनता के बीच नजर नहीं आइयेगा, तो जनता भी पहचानने से इंकार कर देगी। जनता बहुत उम्मीद लेकर नेताओं के दरवाजे जाती है। अगर कुछ कर नहीं सकते तो कम से कम हौसला बढ़ाने के लिए मिल तो सकते ही हैं। लोकसभा चुनाव से पूर्व यह सब हुआ नहीं। उन्हें लगने लगा कि वह अब विधायक बनाने की हैसियत में आ चुके हैं। लेकिन जनता भी जनता है, तुरंत उन्हें जमीन दिखा दी।

    हालांकि जनता आज भी गीता कोड़ा के पक्ष में है, लेकिन पार्टी बदलने से उनके कुछ वोटर्स नाराज हैं। लेकिन नाराजगी तो अपनी जगह है, रणनीति को भेदना इनके सामने बड़ा चैलेंज है। सिंहभूम लोकसभा सीट पर झामुमो की जोबा मांझी ने गीता कोड़ा को 1,68,402 वोटों से हराया। यह गीता कोड़ा जैसी शख्सियत के लिए बड़ी हार थी। लोगों का तो यहां तक कहना है कि गीता कोड़ा अगर आज भी निर्दलीय चुनाव लड़ जायें तो वह जीत जायें। लोकसभा चुनाव का परिणाम कोड़ा दंपति के लिए सबक था। इन्हें समझना होगा कि जेएमएम की क्या रणनीति रही। मधु कोड़ा को समझने के लिए यह बड़ी बात नहीं है कि किस रणनीति के तहत जेएमएम ने काम किया था। गांव में कुछ छुपता थोड़े है। सब बता देते हैं। हो जनजाति का बड़ा तबका गीता कोड़ा के साथ है। लेकिन उन्हें अपने मतदाता तक पहुंचने की जरूरत है। पुराने और नये कार्यकर्ताओं में समन्वय स्थापित करने की जरूरत है। मधु कोड़ा को पुरानी स्टाइल अपनानी पड़ेगी, जहां वह ग्रामीणों से एक-एक कर मिलते थे। जानकारी वहीं से छन कर मिलती है। कौन प्रभावित कर रहा है, कैसे प्रभावित कर रहा है, यह भेद तो वहीं से खुलेगा। फिर उसके हिसाब से रणनीति बनानी पड़ेगी।

    Share. Facebook Twitter WhatsApp Telegram Pinterest LinkedIn Tumblr Email
    Previous Article41 डीएसपी का मूवमेंट ऑर्डर जारी
    Next Article जमादार कृष्णा साव ने सर्विस रिवाल्वर से गोली मार कर की आत्महत्या
    shivam kumar

      Related Posts

      भारत के राजनीतिक इतिहास के सबसे मजबूत स्तंभ बने प्रधानमंत्री मोदी

      June 11, 2026

      ‘युवराज कल्चर’ ही खा गया ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस को

      June 5, 2026

      भाजपा के लिए बड़ी चुनौती होगी टीएमटी के नेटवर्क को तोड़ना, हलके में लेने की गलती ना करे भाजपा

      May 8, 2026
      Add A Comment

      Comments are closed.

      Recent Posts
      • टीएमसी अभिषेक बनर्जी पर एक और एफआइआर, अंफान राहत कोष में 250 करोड़ के घोटाले का आरोप
      • महाधिवक्ता राजीव रंजन ने दिया इस्तीफा
      • मोदी सरकार के 12 वर्ष पूरे होने पर भाजपा की ‘प्रगतिपथ यात्रा’, केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय हुए शामिल
      • रांची के पांच केंद्रों पर शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हुई झारखंड पात्रता परीक्षा, करीब तीन हजार अभ्यर्थी हुए शामिल
      • ममता बनर्जी को एक और झटका, पूर्व मंत्री मानस भुइयां ने तृणमूल कांग्रेस छोड़ी
      Read ePaper

      City Edition

      Follow up on twitter
      Tweets by azad_sipahi
      Facebook X (Twitter) Pinterest Vimeo WhatsApp TikTok Instagram

      Palamu Division

      • Garhwa
      • Palamu
      • Latehar

      Kolhan Division

      • West Singhbhum
      • East Singhbhum
      • Seraikela Kharsawan

      North Chotanagpur Division

      • Chatra
      • Hazaribag
      • Giridih
      • Koderma
      • Dhanbad
      • Bokaro
      • Ramgarh

      South Chotanagpur Division

      • Ranchi
      • Lohardaga
      • Gumla
      • Simdega
      • Khunti

      Santhal Pargana Division

      • Deoghar
      • Jamtara
      • Dumka
      • Godda
      • Pakur
      • Sahebganj

      Subscribe to Updates

      Get the latest creative news from FooBar about art, design and business.

      © 2026 AzadSipahi. Designed by Launching Press.
      • Privacy Policy
      • Terms
      • Accessibility

      Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.

      Go to mobile version