रांची : झारखंड की राजधानी रांची. यहां की कचहरी में सुबह करीब आठ बजे से ही लोगों की लंबी लाइन. यह लाइन किसी मामले की सुनवार्इ के लिए नहीं लगती, बल्कि लोग-बाग यहां की गुमटियों में मिलने वाले स्टांप पेपर की खरीद करने के लिए सुबह से ही लाइन में खड़े रहते हैं. आलम यह कि सुबह से दोपहर बारह बजे तक लंबी लाइन में खड़ा होने के बावजूद ज्यादातर लोगों को जरूरत के मूल्य के स्टांप पेपर नहीं मिलते. इसकी वजह यह है कि झारखंड की राजधानी रांची में इन दिनों स्टांप पेपर की किल्लत चल रही है, जिसकी वजह से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.

मजे की बात यह है कि स्टांप पेपर्स की जिस कालाबाजारी को रोकने के लिए रांची के पूर्व एसडीआे भोर सिंह यादव की आेर से छापेमारी की गयी थी, वह कालाबाजारी अब भी जारी है. आलम यह है कि 10, 20, 50, 100 आैर 500 रुपये के स्टांप पेपर को दोगुने से भी अधिक कीमत पर बेचा जा रहा है, जबकि लाइसेंसी वेंडरों को ट्रेजरार आैर समाहर्ता की आेर से माकूल स्टांप उपलब्ध ही नहीं कराया जा रहा है.स्टांप पेपर की जरूरत न केवल जमीन आैर मकान की खरीद-फरोख्त करने के मामले में पड़ती है, बल्कि वाहन खरीदने, मकान किराया पर लेने की खातिर एग्रीमेंट तैयार कराने के साथ ही अन्य कर्इ मामलों में इसकी जरूरत पड़ती है. इसकी जरूरत पड़ने पर लोग सीधा कचहरी का रास्ता अख्तियार करते हैं, ताकि उन्हें आसानी से वहां पर स्टांप पेपर मिल जायेगा. वहां जाने के बाद लंबी कतार देखने के बाद उनकी आधी हिम्मत पहले ही टूट जाती है. कर्इ दिनों तक चक्कर लगाने के बाद भी कर्इ लोगों को समय पर स्टांप पेपर नहीं मिल पाता.यहां स्टांप पेपर्स की बिक्री करने वाले वेंडरों की मानें, तो झारखंड की राजधानी रांची में इस साल के अप्रैल महीने से ही स्टांप पेपर की किल्लत बनी हुर्इ है. इसकी वजह यह है कि इस साल के अप्रैल महीने में रांची के तत्कालीन एसडीआे भोर सिंह यादव ने स्टांप पेपर्स की कालाबाजारी के नाम पर छापेमारी की थी. उन्हें इस बात की सूचना मिली थी कि कचहरी में स्टांप पेपर्स की कालाबाजारी की जा रही है. इस सूचना पर उन्होंने वेंडरों के यहां छापेमारी की थी आैर करीब चार-पांच वेंडरों को कालाबाजारी के आरोप में जेल भी भेजा था.

वेंडरों का कहना है कि पहले कचहरी में करीब 40 वेंडर स्टांप पेपर्स की बिक्री का काम करते थे. रांची के पूर्व एसडीआे भोर सिंह यादव की छापेमारी के दौरान कर्इ वेंडरों के लाइसेंस रद्द किये गये थे. उन्होंने बताया कि इस समय कचहरी में करीब दर्जन भर ही रह गये हैं. इनमें से चार-पांच वेंडर ही स्टांप पेपर्स की बिक्री कर रहे हैं. इसके लिए वे सुबह के 11 बजे से दोपहर बाद दो बजे तक ही इसकी बिक्री करते हैं. इसका कारण यह है कि जिला समाहर्ता की आेर से उन्हें हर दिन स्टांप पेपर जारी नहीं किया जा रहा है.

कचहरी के वेंडरों ने बताया कि पूर्व एसडीआे भोर सिंह यादव की छापेमारी के बाद सरकार ने सप्ताह में एक दिन ही समाहर्ता की आेर से स्टांप पेपर्स जारी करने के आदेश जारी किये हैं, लेकिन समाहर्ता के यहां पैसा जमा कराने के पखवाड़े भर बाद तक वेंडरों को विभिन्न मूल्यों के स्टांप जारी नहीं किये जा रहे हैं. आलम यह है कि इस समय रांची में 10, 20, 50 आैर 100 रुपये मूल्य के स्टांप की भारी किल्लत चल रही है. 500 रुपये वाला स्टांप वेंडरों के पास उपलब्ध है, लेकिन छोटे मूल्य के स्टांप नहीं होने की वजह से वेंडर अपनी दुकान खोल ही नहीं रहे.

वेंडरों ने यह भी बताया कि सरकार ने रांची में स्टांप पेपर्स की सुलभता बनाये रखने के लिए मुख्य डाकघर आैर डोरंडा पोस्ट आॅफिस के साथ तीन बैंकों बैंक आॅफ बड़ौदा, सेंट्रल बैंक आॅफ इंडिया आैर केनरा बैंक को स्टेक होल्डर बनाकर र्इ-स्टांप जारी करने के लिए अधिकृत किया. आलम यह कि सरकार की आेर से अधिकृत तीन बैंकों में से दो बैंक आॅफ बड़ौदा आैर सेंट्रल बैंक की किसी भी शाखा पर स्टांप उपलब्ध नहीं है.

केनरा बैंक के एक-दो शाखाआें से यह जारी भी किया जा रहा है, तो उसकी संख्या सीमित है. इस कारण वहां से भी लोगों को खाली हाथ लौटना पड़ रहा है. डाकघरों का आलम यह है कि यहां पर आवेदन जमा कराने के चार दिन बाद लोगों को र्इ-स्टांप उपलब्ध कराया जा रहा है. वेंडरों ने यहां तक बताया कि इस मामले को लेकर उन लोगों ने जिले के उपायुक्त, एसडीआे आैर तमाम संबंधित अधिकारियों से शिकायत भी की है. इसके बावजूद अभी तक कोर्इ कार्रवार्इ नहीं की जा सकी है.

इस मामले में रांची जिले के उपायुक्त मनोज कुमार से उनका पक्ष जानने के लिए दूरभाष से संपर्क भी स्थापित किया गया, मगर उनकी आेर से किसी प्रकार का रिस्पाॅन्स नहीं दिया गया है.

Share.

Comments are closed.

Exit mobile version