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    Home»स्पेशल रिपोर्ट»गरीब झारखंड की अमीरी तो धनकुबेरों की आलमारियों में बंद है
    स्पेशल रिपोर्ट

    गरीब झारखंड की अमीरी तो धनकुबेरों की आलमारियों में बंद है

    adminBy adminDecember 9, 2023Updated:December 10, 2023No Comments12 Mins Read
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    विशेष
    -छह सौ करोड़ का कारोबार, तीन सौ करोड़ से अधिक की नगदी घर पर

    जब से झारखंड बना, कहा जाने लगा कि यह एक गरीब राज्य है। लेकिन एक सवाल हमेशा मेरे मन में तैरता है कि जिस राज्य के पास देश की 40 प्रतिशत प्राकृतिक संपदा का स्रोत हो, वह गरीब कैसे हो सकता है। सवाल जायज भी है। समय बीतने के साथ पता चला कि झारखंड का हमेशा इस्तेमाल ही हुआ है। यहां की प्राकृतिक संपदाओं का इस्तेमाल दूसरे राज्यों को संवारने में हुआ। इसके एवज में झारखंड को मिली गरीबी, विस्थापन का दंश और असीम भ्रष्टाचार की संभावनाएं। खैर झारखंड जैसे-तैसे आगे बढ़ा। राजनीतिक अस्थिरता और भ्रष्टाचार के बोझ तले झारखंड का विकास दबता चला गया। भ्रष्टाचार के मामलों में यहां के राजनेताओं ने रिकॉर्ड भी बनाया। लेकिन जब राजनीतिक स्थिरता आयी, तब भी झारखंड का विकास उसी ढर्रे पर रहा, जैसा पहले था। झारखंड का विकास रेंग रहा था। आज 2023 है और झारखंड 23 साल का हो चुका है। खबर आयी कि झारखंड के सबसे रईस परिवारों में से एक साहू परिवार के धीरज साहू के यहां आइटी का छापा पड़ा है। अब नोट निकलने लगे। पहले खबर आयी कि एक करोड़ कैश मिले हैं। फिर खबर आयी कि पांच करोड़ मिले। अब लोगों में चर्चाओं का दौर शुरू हुआ। कहा जाने लगा कि बहुत ज्यादा यह आंकड़ा जायेगा तो 10 करोड़ जायेगा। लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता गया झारखंड ही नहीं देश की जनता का माथा चकराता गया। 20, 30, अरे 50 करोड़ मिला। जिस हिसाब से तीन राज्यों के चुनाव परिणाम आने के बाद अडाणी के शेयर में उछाल आया था, उससे कहीं ज्यादा तेजी से कांग्रेस से राज्यसभा सांसद धीरज साहू के ठिकानों से नोटों की गड्डियां मिलती गयीं। आंकड़ा 100 करोड़ पहुंचा। लगा अब बस। इससे ज्यादा नहीं मिलेगा। हो गया। लेकिन कुछ घंटों के बाद खबर फिर आयी कि कैश की गिनती 200 करोड़ के पार हो गयी है। आज यह आंकड़ा 300 की दहलीज को पार कर चुका है। गिनते जाइये, क्योंकि अभी सात कमरे खुलने बाकी हैं। उन कमरों में भी कई लॉकर हैं, जिसे अभी छुआ तक नहीं गया है। बैंक लॉकर की बात तो अलग। जेवर-जेवरात की तो अभी बात ही नहीं हो रही। चालीस मशीनें गिनती में लगी हैं। आधा दर्जन मशीनों ने दम तोड़ दिया। देश में सबसे ज्यादा मात्रा में प्राप्त होने वाली राशि किसी एक व्यक्ति के ठिकानों से यह पहली बार है। कहा जा रहा है कि अभी यह मात्र पांच आलमारियों से प्राप्त राशि है। अभी और आलमारी की गिनती बची है। यहां मेरे उस सवाल का जवाब मिल गया कि झारखंड गरीब राज्य क्यों है। अगर झारखंड की अमीरी धनकुबेरों की आलमारी में बंद रहेगी तो झारखंड गरीब ही रहेगा। यह तो बस शुरूआत मात्र है। आज झारखंड का गरीब खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि देशवासी इन नोटों के ढेर को देखें और फिर इनके नेताओं की ईमानदारी के भाषणों को सुनें। जनता से जो लूटा है, उसकी पाई-पाई लौटानी पड़ेगी, यह मोदी की गारंटी है। धीरज साहू के ठिकानों से बरामद बेहिसाब नगदी की पृष्ठभूमि में झारखंड की गरीबी के कारणों की पड़ताल कर रहे हैं आजाद सिपाही के विशेष संवाददाता राकेश सिंह।

    करीब पांच साल पहले एक फिल्म आयी थी, ‘रेड’ यानी छापा। हिंदी भाषा की वह फिल्म एक दबंग सांसद रामेश्वर सिंह उर्फ ताऊजी के यहां आयकर छापामारी पर आधारित थी। फिल्म का नायक अमय पटनायक (अजय देवगन) आयकर उपायुक्त होता है। छापामारी खत्म करने के बाद सरकारी गवाह और उस गांव के इंटर कॉलेज के प्रिंसिपल को जब्ती सूची पर दस्तखत करने को कहता है। वह प्रिंसिपल उससे कहता है कि यह सब बेकार है। आप इसे ले जाकर सरकारी खजाने में जमा कर देंगे और सरकार जब इसे खर्च करने लगेगी, तो ऐसे ही लोग इसे दोबारा लूट लेंगे।
    उस लोकप्रिय हिंदी फिल्म का यह दृश्य पिछले तीन दिन से लगातार आंखों के सामने कौंध रहा है, क्योंकि झारखंड के एक राज्यसभा सांसद के यहां से जो नगदी बरामद हो रही है, वह कुछ हद तक उस फिल्मी सांसद के यहां से हुई बरामदगी के बराबर है। झारखंड के इस सांसद का नाम है धीरज प्रसाद साहू और वह कांग्रेस के टिकट पर राज्यसभा के लिए चुने गये हैं। उनके ठिकानों पर चल रही आयकर छापामारी में अब तक तीन सौ करोड़ रुपये नगद बरामद हो चुके हैं, जबकि छापामारी अब भी जारी है। बरामद नोटों की गिनती करने में मशीनें भी हांफ रही हैं। इस बरामदगी की चर्चा इसलिए जरूरी है, क्योंकि यह उस झारखंड में हो रहा है, जो देश के सबसे गरीब और पिछड़े राज्यों की सूची में आता है।
    आम तौर पर कोई भी बड़ा से बड़ा धनकुबेर कानूनन अपने घर पर पैसा ज्यादा नहीं रख सकता है। अगर आप टाटा-बिड़ला के यहां भी जायेंगे, तो वहां इतना नगद पैसा नहीं मिलेगा, जितना झारखंड के एक सांसद के ठिकानों पर मिल रहा है। यह तो केवल नगद है। हीरे-जवाहरात, अचल संपत्ति और निवेश के दूसरे माध्यमों का तो अब तक हिसाब भी नहीं लगाया गया है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि एक गरीब राज्य के सांसद के पास कितनी संपत्ति है और सवाल यह भी है कि इतनी संपत्ति उस सांसद ने कैसे अर्जित की।

    इत्र कारोबारी के पास भी मिली थी बेहिसाब नगदी
    आज से करीब दो साल पहले कानपुर के इत्र कारोबारी पीयूष जैन के कानपुर स्थित आवास से 181 करोड़ रुपये नगद के बाद कन्नौज के घर की दीवारों, फर्श, सीलिंग और तहखानों से करोड़ों रुपये और सोना-चांदी के आभूषण बरामद हुए थे। महानिदेशालय जीएसटी इंटेलीजेंस (डीजीजीआइ) और आयकर विभाग की कार्रवाई में करीब 110 करोड़ रुपये नकद और 275 किलो सोना-चांदी बरामद हुआ था। मशीनों से नोटों की गिनती का सिलसिला तीन दिनों तक चला था। सबसे बड़ी रकम पीयूष जैन के बेड रूम में दीवार के अंदर से मिली थी। इसके अलावा सीढ़ियों के अंदर बने होल से भी कुछ रुपये मिले थे। बरामद रुपयों में दो हजार, पांच सौ, सौ और दस-दस के नोट थे। कारोबारी के घर की दीवारों को तोड़ने के लिए करीब 10 मजदूर लगाये गये थे। इन लोगों ने गैस वेल्डिंग कटर और छेनी-हथौड़ों से दीवारों और लॉकरों को तोड़ा था। दरवाजों को खोलने के लिए डुप्लीकेट चाबी बनाने के लिए पांच कारीगरों को लगाया गया था।

    कौन हैं धीरज प्रसाद साहू
    धीरज साहू झारखंड से राज्यसभा के सांसद हैं। वह तीसरी बार सांसद चुने गये हैं। राजनीति के अलावा धीरज साहू के परिवार का पुराना कारोबार है। शराब का कारोबार धीरज साहू के पिता के समय से ही चलता आ रहा है। साहू परिवार झारखंड के लोहरदगा का रहनेवाला है और इसका अधिकतर कारोबार ओड़िशा में चलता है। धीरज साहू चतरा से दो बार लोकसभा का चुनाव भी लड़ चुके हैं, लेकिन जीत नहीं सके। धीरज साहू तीसरी बार झारखंड से राज्यसभा सांसद बने हैं। उनके पिता राय साहब बलदेव साहू भी उद्योगपति थे। 64 वर्षीय धीरज साहू के भाई दिवंगत शिव प्रसाद साहू रांची से लोकसभा सांसद रहे हैं। 2018 के राज्यसभा चुनाव में धीरज साहू ने अपनी संपत्ति 38 करोड़ रुपये बतायी थी। उसमें उन्होंने 6 करोड़ रुपये कर्ज भी दिखाया था।
    धीरज साहू का जन्म नवंबर 1959 में हुआ। उन्होंने स्नातक की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद राजनीति में कदम बढ़ा दिये। जुलाई 2010 में धीरज साहू पहली बार कांग्रेस की ओर से राज्यसभा सांसद चुने गये थे। 2018 में धीरज एक बार फिर झारखंड से कांग्रेस के राज्यसभा सांसद बनाये गये। धीरज साहू को राजनीति विरासत में मिली। उनका परिवार आजादी के बाद से ही कांग्रेस से जुड़ा हुआ है। 1977 में राजनीति में आनेवाले धीरज 1978 में जेल भरो आंदोलन में जेल गये थे।

    कैसे जमा किया होगा इतना पैसा
    अब लोग सोच रहे हैं कि आखिर धीरज साहू ने इतना पैसा कैसे जमा किया होगा, वह भी पांच सौ, दो सौ और एक सौ रुपये के नोटों में। यह मान भी लिया जाये कि यह सारा पैसा कारोबार का है, तो भी आखिर साहू परिवार के कारोबार का आकार कितना बड़ा है। इस परिवार द्वारा जो कारोबार घोषित किया गया है, उसके अनुसार इनकी सभी कंपनियों का कुल टर्नओवर छह सौ करोड़ रुपये है। छह सौ करोड़ रुपये का कारोबार करनेवाली कंपनी के मालिक के यहां से यदि तीन सौ करोड़ रुपये से अधिक नगद बरामद हो रहे हैं और वह भी पांच सौ, दो सौ और एक सौ रुपये के नोटों की शक्ल में, तो यह सवाल भी उठता है कि यह रकम तो दो हजार के नोट का चलन बंद होने के बाद, यानी 30 नवंबर के बाद की है। या फिर धीरज साहू ने अपने पास रखे दो हजार रुपये के सारे नोट समय रहते बदल लिये थे। इन सबकी जांच अभी की जानी है।

    कहां इस्तेमाल होता है काला धन
    आज के दौर में लोकतांत्रिक व्यवस्था में काले धन का इस्तेमाल या तो सांसदों-विधायकों की खरीद-बिक्री के लिए किया जाता है या फिर घूसखोरी के लिए। ऐसे में भाजपा के इस आरोप को कैसे गलत ठहराया जा सकता है कि धीरज साहू के ठिकानों से जो अकूत रकम बरामद हुई है, उसका इस्तेमाल इसी तरह की अनैतिक और गैर-कानूनी गतिविधियों में नहीं किया जा रहा होगा या किया जाता। इन सवालों का जवाब तो अब धीरज साहू और कांग्रेस को देना ही होगा।

    छह सौ करोड़ का कारोबार, तीन सौ करोड़ से अधिक नगदी घर पर
    साहू परिवार रईस परिवार है। पुराना कारोबारी। लेकिन छह सौ करोड़ के कारोबार वाले परिवार में तीन सौ करोड़ रुपये से अधिक की नगदी सवाल खड़ा कर रही है। इसमें कोई दो राय नहीं कि नियमों-कानूनों का उल्लंघन कर ही अकूत धन इकट्ठा किया गया है। उनके ठिकानों से जितना पैसा बरामद किया गया है, उससे कई गांवों और शहरों की तस्वीर बदल सकती है। लोहरदगा की पहचान एक नक्सलग्रस्त गरीब जिले के रूप में होती है और झारखंड की पहचान पिछड़ेपन से होती है। इस लोहरदगा और झारखंड ने साहू खानदान को इज्जत दी, प्रतिष्ठा दी, प्यार दिया, सम्मान दिया और आज उस परिवार के पास से इतनी अकूत संपत्ति सामने आ रही है। धीरज साहू के यहां हुई इस छापेमारी से एक बात सबके सामने आ गयी कि आखिर कैसे एक पिछड़े राज्य में काला धन जमा किया जा रहा है। यहां के गरीब एक किलो अनाज के लिए घंटों दूरी तय कर सरकारी दुकान पर जाते हैं, एक हजार रुपये पेंशन के लिए दिन भर बैंक की लाइन में लगे रहते है, लेकिन धीरज साहू के पैसे को देख कर सभी के होश उड़ गये हैं। लोग चर्चा कर रहे हैं कि पिछड़े झारखंड में सिर्फ आम आदमी बदहाल है, नेता और अधिकारी तो मालमाल हैं।

    पड़ताल
    पहले दिन नोटों से भरी 30 आलमारी मिली
    आयकर विभाग ने धीरज साहू के ठिकानों पर बुधवार 6 दिसंबर को छापेमारी शुरू की थी। 7 दिसंबर तक शराब बनाने वाली कंपनी बलदेव साहू एंड ग्रुप आॅफ कंपनीज के कार्यालय में नोटों से भरी 30 आलमारियां मिली थीं। आलमारियों में 500, 200 और 100 रुपये के नोट के बंडल रखे गये थे। नोटों से भरे कई बैग भी मिले। हालांकि आलमारियों में कितना कैश था, इसकी जानकारी आइटी टीम ने नहीं दी। अभी लॉकरों को खोला जाना बाकी है। गुरुवार की शाम तक 260 करोड़ का कैश मिल चुका था। इसके बाद यह राशि बढ़ती चली गयी। इसके बाद, शुक्रवार को आयकर विभाग को ओड़िशा के टिटलागढ़ में शराब कारोबार संभालने वाले संजय साहू और दीपक साहू के घर से 8 करोड़ रुपये बरामद हुए हैं। राइस मिलर और ट्रांसपोर्टर राजकिशोर जायसवाल के ठिकानों से भी बड़ी रकम जब्त हुई। ओड़िशा के बौध जिले की राइस मिल और बौध डिस्टलरी प्राइवेट लिमिटेड में शुक्रवार को देर शाम छापेमारी हुई। यहां से भी कैश मिलने की खबर है।

    कहां-कहां छापा
    ओडिशा में बौध डिस्टिलरीज प्राइवेट लिमिटेड कंपनी और इससे जुड़े परिसरों में छापेमारी, बलदेव साहू एंड ग्रुप आॅफ कंपनीज के ठिकाने (यह बौध डिस्टिलरी की पाटर्नशिप फर्म है), बौध डिस्टिलरी के भुवनेश्वर स्थित कॉरपोरेट आॅफिस और अधिकारियों के घर, बोलांगीर के सुदापाड़ा और टिटलागढ़ के दो शराब व्यापारियों के घर, रांची के रेडियम रोड पर बना सुशीला निकेतन (सांसद का घर), लोहरदगा स्थित सांसद धीरज साहू के घर पर चल रही आयकर विभाग की दबिश।

    नोटों में नमी, आधा दर्जन मशीनें खराब
    लंबे समय से आलमारी में रखे होने के कारण नोटों में नमी आ गयी है, जिसकी वजह से नोट एक दूसरे से चिपक गये हैं। नोट गिनने के दौरान अब तक आधा दर्जन मशीनें खराब हो चुकी हैं, इस कारण गिनती में देर हो रही है। भुवनेश्वर से बड़ी मशीनें मंगायी गयी हैं। गिनती अब तक जारी है।

    कंपनी के कर्मचारियों ने 500-500 के नोटों को फाड़कर फेंकना शुरू किया
    आयकर की छापेमारी को देखते हुए बौध जिला स्थित बौद्ध डिस्टलरी प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के कर्मचारियों ने 500-500 के नोटों को फाड़कर फेंकना शुरू कर दिया। आयकर विभाग के अधिकारियों ने छापेमारी के दौरान जब कंपनी के चहारदीवारी के आसपास देखा तो पाया कि पांच-पांच सौ के नोट फाड़कर फेंके हुए हैं। आयकर विभाग के अधिकारियों ने नोटों को जब्त कर लिया। फटे हुए नोट चहारदीवारी के अलावा बॉटलिंग प्लांट के बॉयलर के नजदीक मिले।

    250 से अधिक शराब दुकानें, 42 कर्मचारी भागे
    बलदेव साहू संस एंड ग्रुप की ओड़िशा में 250 से अधिक शराब की दुकानें हंै। आयकर की छापेमारी के बाद बोलांगीर जिले की 42 दुकानों के कर्मचारी दुकानें बंद कर भाग गये हैं। उन्हें गिरफ्तारी और पूछताछ का डर है। आयकर विभाग के महानिदेशक संजय बहादुर नोटों की जब्ती और गिनती सहित पूरे अभियान पर नजर रख रहे हैं। इस सिलसिले में अब तक किसी को गिरफ्तार नहीं किया गया है। वहीं, शराब का कारोबार करने वाली कंपनी की ओर से भी अभी तक छापे को लेकर कोई प्रतिक्रिया नहीं आयी है।

    40 एकड़ में फैली है बौद्ध डिस्टलरी प्राइवेट लिमिटेड कंपनी
    बौद्ध डिस्टलरी प्राइवेट लिमिटेड भुवनेश्वर से करीब 200 किलोमीटर दूर स्थित बौध जिले में है। यह 40 एकड़ में फैली है। इस ग्रुप के निदेशकों में अमित साहू, रितेश साहू और उदय शंकर प्रसाद का नाम है। विभागीय सूत्रों के मुताबिक नोटों की गिनती पूरी होने के बाद ही कंपनी से जुड़े लोगों से पूछताछ की जा सकती है। कहा जाता है कि यह शराब बनाने और बिक्री करने वाली देश की सबसे बड़ी कंपनियों में शुमार है।

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