आजाद सिपाही संवाददाता
नयी दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि आतंकवाद, भ्रष्टाचार, मादक पदार्थों की तस्करी, संगठित अपराध जैसे खतरे पहले से ज्यादा तेजी से बढ़ रहे हैं। जब संकट ग्लोबल हो तो प्रतिक्रिया सिर्फ लोकल नहीं हो सकती है। उन्होंने कहा कि इन खतरों से निपटने के लिए दुनिया के एकजुट होने का समय आ गया है। आज के समय में आतंकवाद सिर्फ भौतिक रूप में मौजूद नहीं है, बल्कि वह अब साइबर खतरों और ऑनलाइन कट्टरता के माध्यम से दायरा बढ़ा रहा है। प्रधानमंत्री ने अंतरराष्ट्रीय एजेंसी को खरी-खरी सुनायी।
अपराध के लिए कोई सुरक्षित जगह नहीं होनी चाहिए:
प्रधानमंत्री ने कहा कि भ्रष्टाचार और वित्तीय अपराध ने कई देशों के नागरिकों के हितों को नुकसान पहुंचाया है। भ्रष्टाचारी अपराध से जुटाये धन को दुनिया के दूसरे हिस्सों में जमा करते हैं। यह पैसा उस देश के नागरिकों का है, जहां से उन्होंने लिया है। आगे यह धनराशि खतरनाक गतिविधियों में इस्तेमाल की जाती है। यह टेरर फंडिंग का एक बड़ा स्रोत है। उन्होंने कहा कि संगठित अपराध के लिए कोई सुरक्षित जगह नहीं होनी चाहिए। एक जगह पर लोगों के खिलाफ ऐसे अपराध हर किसी के खिलाफ अपराध होते हैं, ये मानवता के खिलाफ अपराध होते हैं।
भारत ने दुनिया को बेहतर बनाने के लिए बलिदान दिये:
मोदी ने कहा कि भारत ने दुनिया को बेहतर बनाने के लिए बलिदान दिये हैं। हमारी पुलिस करीब 900 राष्ट्रीय और 10 हजार राज्यों के कानून के तहत अपने फर्ज को अंजाम देती है। उन्होंने कहा कि विविधता और लोकतंत्र को कायम रखने में भारत दुनिया के लिए एक केस स्टडी है। उन्होंने कहा कि पिछले 99 वर्षों में इंटरपोल ने 195 देशों में विश्व स्तर पर पुलिस संगठनों को जोड़ा है।
195 देशों के प्रतिनिधि कर रहे शिरकत:
इस महासभा में 195 देशों के प्रतिनिधि शिरकत कर रहे हैं। इनमें सदस्य देशों के मंत्री, पुलिस प्रमुख, केंद्रीय ब्यूरो के प्रमुख और वरिष्ठ पुलिस अधिकारी शामिल हैं। महासभा की बैठक नयी दिल्ली में 18 अक्टूबर से 21 अक्टूबर तक चलेगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन के साथ ही इस महासभा की शुरूआत हुई। वहीं समापन भाषण केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह देंगे। प्रधानमंत्री ने महासभा के उद्घाटन के दौरान पोस्टल स्टांप और 100 रुपये का सिक्का भी जारी किया।
दाऊद और सईद को कब सौंपोगे? पाक अफसरों ने साधी चुप्पी
इंटरपोल की बैठक में शामिल होने भारत आये पाकिस्तानी अफसर को दाऊद इब्राहिम और लश्कर-ए-तैयबा के चीफ हाफिज सईद का नाम सुन कर ही सांप सूंघ गया। वे पल्ला झाड़ते हुए अपनी सीट पकड़ कर बैठ गये। दरअसल पाकिस्तान की सबसे बड़ी जांच एजेंसी फेडरल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी के डायरेक्टर जनरल मोहसिन बट से जब मीडिया कर्मियों ने सवाल करना चाहा तो वह पहले ही बोलने से इनकार करने लगे। हालांकि पत्रकार ने उनसे पूछ ही लिया कि पाकिस्तान कब दाऊद और आतंकी हाफिज सईद को भारत को सौंपेगा। इस पर पाकिस्तान अफसर ने चुप्पी साध ली।