रांची। नेता प्रतिपक्ष हेमंत सोरेन ने मुख्यमंत्री रघुवर दास को लीगल नोटिस भेजा है। मुख्यमंत्री रघुवर दास ने साहेबगंज में…
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ल्लकरम अखरा और 50 हजार की भीड़, यह सुदेश ही कर सकते हैं
रांची. स्वभाषा के माध्यम से भारत विश्वगुरु बन सकता है। स्वभाषा विकास का परिचायक है। यह भारत के स्वाभिमानी भारत…
लोकसभा चुनाव में अपने गढ़ संथाल में शिबू सोरेन को पराजय का सामना करना पड़ा और उसके बाद से झारखंड की सबसे पुरानी क्षेत्रीय पार्टी झारखंड मुक्ति मोर्चा में शिबू युग का अवसान हो गया। स्वाभाविक तौर पर शिबू राजनीति के केंद्र में नहीं रहे। इसका सबसे बड़ा असर यह हुआ है कि झामुमो अपना तेवर तेजी से खो रहा है। अब इस पार्टी में वह बात नहीं रही, जो आज से पांच साल पहले हुआ करती थी। अब झामुमो के प्रति न लोगों में उतना मोह रहा और न ही नेताओं-कार्यकर्ताओं के मन में सम्मान। आखिर ऐसा क्या हुआ कि झामुमो आज एक ऐसे दोराहे पर खड़ा हो गया है, जहां से उसे अपने सुनहरे भविष्य का रास्ता चुनने के लिए बाध्य होना पड़ रहा है। झामुमो के सामने अपने आकर्षण और दबदबे को बनाये रखने की चुनौती है। इस लिहाज से झारखंड की पांचवीं विधानसभा के लिए इस साल के अंत तक होनेवाला चुनाव झामुमो और इसके नेता हेमंत सोरेन के लिए ‘करो या मरो’ जैसा है। आखिर झामुमो की यह हालत क्यों हुई। इसका जिम्मेदार कौन है, इसे रेखांकित करती दयानंद राय की रिपोर्ट।
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वॉशिंगटन. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने शनिवार को अलकायदा के सरगना रहे ओसामा बिन लादेन के बेटे हमजा (30) के…
श्रीनगर: पाकिस्तान बार-बार उकसावे की कार्रवाई से बाज नहीं आ रहा है। सीमा पर लगातार पाकिस्तान की तरफ से गोलीबारी…
नई दिल्ली: पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने 15वें वित्त आयोग के विषय एवं शर्तों में बदलाव के तरीके को ‘एकपक्षीय’…
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